दिल्ली में आटा, दाल एवं खाद्य तेल की कीमतों में वृद्धि

16-May-2025 11:52 AM

नई दिल्ली। समझा जाता है कि थोक बाजार में आपूर्ति की गति सामान्य नहीं होने से लगभग सभी अनाजों, दाल-दलहनों तथा खाद्य तेल / वनस्पति घी आदि के दाम में तेजी आ रही है जिससे इसका खुदरा भाव स्वाभाविक रूप से बढ़ रहा है।

कुछ दालों के मूल्य में तो 10 रुपए प्रति किलो से भी अधिक का इजाफा हो चुका है। ब्रांडेड वनस्पति तेल और घी के निर्माताओं के नए आर्डर के सापेक्ष माल की आपूर्ति रोक दी है जबकि स्थानीय फ्लोर मिलर्स भी नए आर्डर को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

फ्लोर मिलर्स ने अपने गेहूं उत्पादों के दाम में भी कम से कम 4 रुपए प्रति किलो का इजाफा कर दिया है। दालों एवं अनाजों का थोक भाव भी ऊपर उठ रहा है।

दिल्ली के थोक बाजार में राजमा का भाव 118 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 132 रुपए प्रति किलो हो गया है। अरहर (तुवर) दाल की कीमतों में भी लगभग इतनी ही बढ़ोत्तरी हो गई है। परिवहन खर्च में भी इजाफा हुआ है। 

रिटेल किराना मर्चेंट्स एसोसिएशन के महामंत्री का कहना है कि रिफाइंड खाद्य तेल, वनस्पति घी तथा सरसों तेल के मूल्य में भी करीब 10 रुपए प्रति लीटर / किलो की बढ़ोत्तरी हो गई है क्योंकि कंपनियां नए माल की डिलीवरी नहीं दे रही हैं।

फ्लोर मिलों ने 10 किलो की पैकिंग में आटा का दाम 290 रुपए से बढ़ाकर 320 रुपए कर दिया है। ब्रांडेड गेहूं आटा तथा सरसों तेल के मिलर्स नए आर्डर को स्वीकार ही नहीं कर रहे हैं।

इससे आपूर्ति का संकट बढ़ गया है। ध्यान देने वाली बात है कि फिलहाल थोक मंडियों में गेहूं एवं सरसों के अन्य माल की भारी आवक हो रही है और मिलर्स / प्रोसेसर्स द्वारा इसकी अच्छी खरीद भी की जा रही है लेकिन फिर भी आटा और सरसों तेल की डिलीवरी देने में आनाकानी की जा रही है। गेहूं एवं सरसों के थोक बाजार मूल्य में जोरदार उछाल भी नहीं आया है। 

एक अग्रणी व्यापार विश्लेषक के अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव तथा युद्ध की आशंका को देखते हुए आम उपभोक्ता आवश्यक वस्तुओं की घबराहटपूर्ण लिवाली कर रहे हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में दालों एवं खाद्य तेलों की मांग काफी बढ़ गई है। जब मांग कमजोर पड़ेगी तब कीमतों में भी नरमी आ जाएगी। दिल्ली के थोक बाजार में मजदूरों का भी भारी अभाव देखा जा रहा है।

मजीठा मंडी, आटा मंडी एवं ढाब मंडी में श्रमिकों की संख्या 25 प्रतिशत से ज्यादा घट गई है। इससे माल की लोडिंग-अनलोडिंग में कठिनाई हो रही है।

हालांकि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध समाप्त हो चुका है मगर अभी तक हालात सामान्य नहीं हुए हैं। इससे मंडियों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

तनाव खत्म होने की स्पष्ट तस्वीर सामने आने के बाद कारोबार सामान्य हो जाएगा और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में नरमी आने लगेगी।