दिसम्बर के बाद ही चीनी का निर्यात खोलने के प्रस्ताव पर विचार संभव
09-Sep-2024 04:06 PM
नई दिल्ली । केन्द्र सरकार घरेलू प्रभाग में चीनी की आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और उसके बाद एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने का इरादा रखती है।
इन दोनों मोर्चे पर पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद अधिशेष स्टॉक वाली चीनी का निर्यात करने की अनुमति देना चाहती है।
हालांकि चीनी उद्योग लम्बे समय से चीनी के निर्यात की मंजूरी देने का आग्रह कर रहा है और इसे 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में इस पर सरकारी तौर पर सकरात्मक रूख दिखाए जाने की उम्मीद भी है लेकिन फिलहाल इसकी संभावना बहुत कम है।
सरकार अभी चीनी का व्यापारिक निर्यात खोलने के मूड में नहीं दिखती है। वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार कम से कम दिसम्बर 2024 तक निर्यात के प्रस्ताव पर विचार होने की संभावना नहीं है।
ध्यान देने की बात है कि अक्टूबर 2023 में सरकार ने चीनी के निर्यात पर अनिश्चित कालीन प्रतिबंध लगाने की जानकारी के साथ एक अधिसूचना जारी की थी।
खाद्य मंत्रालय को 2024-25 के मार्केटिंग सीजन के आरंभ में उद्योग के पास 90 लाख टन चीनी का पिछला बकाया स्टॉक मौजूद रहने की उम्मीद है जो अगले ढाई माह तक घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक स्टॉक से करीब 25 लाख टन ज्यादा है।
यदि 2024-25 के सीजन में घरेलू उत्पादन 10 लाख टन घटकर 310 लाख टन पर भी सिमटता है तब सीजन के दौरान 15 लाख टन का निर्यात योग्य अधिशेष स्टॉक बच सकता है।
लेकिन सरकार भारी वर्षा एवं भयंकर बाढ़ के कारण गन्ना की फसल को हो रहे नुकसान की वास्तविकता से भी अवगत है जिससे चीनी का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
दो वर्ष पूर्व बिहार एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश में ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई थी। अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं हो जाती तब तक चीनी निर्यात की नीति में बदलाव होना मुश्किल है।
दिसम्बर के बाद ही असली स्थिति की जानकारी मिल सकती है। उससे पूर्व वर्तमान नीति बरकरार रह सकती है।
केन्द्रीय खाद्य मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि चीनी निर्यात पर कोई निर्णय अगले सीजन में गन्ना एवं चीनी के संभावित उत्पादन का आंकलन करने के बाद ही लिया जा सकेगा।
