धान के रकबे में 50 लाख हेक्टेयर की कटौती के प्लान से विशेषज्ञ चिंतित
10-May-2025 04:28 PM
चंडीगढ़। कृषि विशेषज्ञों ने धान के क्षेत्रफल में 50 लाख हेक्टेयर की कटौती करकर उसमें दलहन-तिलहन फसलों की खेती करने के सरकारी प्लान पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
उनका कहना है कि इस योजना के लागू होने पर न केवल धान-चावल के उत्पादन में भारी गिरावट आ जाएगी बल्कि दलहन-तिलहन के उत्पादन में अपेक्षित बढ़ोत्तरी भी नहीं हो पाएगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक चावल का उत्पादन घटने पर न सिर्फ इसके निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ेगा बल्कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा भी पैदा हो सकता है।
यह सही है कि वर्तमान समय में सरकार के पास चावल का विशाल स्टॉक मौजूद है और घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ती एवं उपलब्धता की स्थिति भी सुगम बनी हुई है लेकिन उत्पादन घटने पर संकट बढ़ सकता है।
लेकिन सरकार का तर्क अलग है। वह चाहती है कि आगामी खरीफ सीजन में धान का उत्पादन क्षेत्र 50 लाख हेक्टेयर घटाकर उसमें 100 लाख टन दलहन-तिलहन का उत्पादन प्राप्त किया जाए ताकि इसकी पैदावार में आत्मनिर्भरता हासिल करने तथा दलहनों एवं खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता घटाने में सहायता मिल सके। धान की उच्च उपज दर वाली किस्मों की खेती का दायरा बढ़ाकर उत्पादन को सामान्य स्तर पर रखने में सहायता मिल सकती है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसानों को दलहनों-तिलहनों का सुरक्षित बीज, आवश्यक सहयोग-समर्थन एवं आधुनिक कृषि पद्धति का प्रशिक्षण नहीं दिया गया तो इसका समुचित उत्पादन संभव नहीं हो पाएगा।
एक विशेषज्ञ के मुताबिक यदि पहले उत्पादकों को प्रशिक्षित नहीं किया गया तो यह योजना लाभदायक के बजाए नुकसानदायक साबित हो सकती है क्योंकि इससे चावल का उत्पादन घटेगा और भाव बढ़ेगा जबकि दलहन-तिलहन के उत्पादन में भी ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं हो पाएगी।
वैसे भी धान की खेती से किसान इस तरह चिपके हुए हैं कि वे आसानी से उसे नहीं छोड़ सकते हैं और धान के बजाए अन्य फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने हेतु उन्हें अतिरिक्त प्रलोभन देना आवश्यक होगा। अगले खरीफ सीजन में सरकार की योजना के परिणाम पर सबका ध्यान केन्द्रित रहेगा।
