उत्पादन घटने की आशंका से चीनी के निर्यात की संभावना धूमिल
24-Dec-2024 11:33 AM
नई दिल्ली । उद्योग-व्यापार क्षेत्र के विश्लेषको का कहना है कि पिछले साल के सूखे से इस वर्ष गन्ना की पैदावार घटने के संकेत मिल रहे हैं और चालू वर्ष की अत्यधिक बारिश की वजह से चीनी की रिकवरी दर में भी कमी आ रही है। इसके फलस्वरूप पिछले आठ साल में पहली बार देश में चीनी का उत्पादन घरेलू मांग एवं खपत से कम होने की आशंका है।
ब्राजील के बाद भारत दुनिया में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। यदि यहां चीनी का उत्पादन उम्मीद से कम हुआ तो न केवल इसके निर्यात की संभावना समाप्त हो जाएगी बल्कि वैश्विक बाजार में चीनी का दाम बढ़ने का आधार भी तैयार हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि भारत में चीनी के कुल उत्पादन में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश एवं कर्नाटक का संयुक्त योगदान 80 प्रतिशत से भी अधिक रहता है लेकिन 2024-25 के मौजूदा सीजन के दौरान इन राज्यों में गन्ना एवं चीनी का उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है।
एक अग्रणी उद्योग समीक्षक के अनुसार 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में चीनी का घरेलू उत्पादन घटकर 270 लाख टन के आसपास सिमट सकता है जो 2023-24 सीजन के उत्पादन 320 लाख टन से करीब 50 लाख टन तथा कुल अनुमानित घरेलू उपयोग 290 लाख टन से 20 लाख टन कम है।
उद्योग के पास पिछले सीजन के चीनी का जो बकाया अधिशेष स्टॉक मौजूद है उसका उपयोग घरेलू मांग एवं खपत को पूरा करने में हो जाएगा और इस तरह निर्यात उद्देश्य के लिए चीनी का अतिरिक्त स्टॉक हासिल होना मुश्किल लगता है। यदि एथनॉल निर्माण में चीनी का कम इस्तेमाल हुआ तो खाद्य उद्देश्य के लिए इसका स्टॉक सामान्य स्तर पर रह सकता है।
उधर वेस्टर्न इंडिया शुगर मिल्स एसोसिएशन (विस्मा) के अध्यक्ष का कहना है कि ग्रीष्मकालीन महीनों के दौरान लम्बे समय तक बारिश नहीं होने तथा तापमान ऊंचा रहने से गन्ना की फसल का विकास कई महत्वपूर्ण उत्पादक इलाकों में प्रभावित हुआ।
इसके बाद जब मानसून सीजन आरंभ हुआ तब कई क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा बारिश हुई और फसल को पर्याप्त धूप नहीं मिल सकी। इससे गन्ना की उपज दर में 10-15 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना है।
