उत्पादन की तुलना में गेहूं की घरेलू खपत कम होने का अनुमान
28-Apr-2025 05:57 PM
नई दिल्ली। पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान गेहूं के घरेलू उत्पादन में अच्छी वृद्धि होने का अनुमान है जबकि इसकी सरकारी एवं व्यापारिक खरीद में भी अच्छी बढ़ोत्तरी होने के संकेत मिल रहे हैं। रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (आरएफएमएफआई) के अध्यक्ष नवनीत चितलांगिया का कहना है
कि चालू वर्ष के दौरान देश में लगभग 1090 लाख टन गेहूं का उत्पादन तथा 1030-1040 लाख टन का उपयोग हो सकता है और इसके आधार पर 50-60 लाख टन का अधिशेष स्टॉक मौजूद रह सकता है।
हालांकि सरकार ने 312.70 लाख टन की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है और अभी तक खरीद की स्थिति भी काफी अच्छी है लेकिन इसकी कुल मात्रा 290-300 लाख टन तक पहुंचने की उम्म्मीद है। पिछले साल 266 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई थी।
फेडरेशन के अध्यक्ष के अनुसार महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार केन्द्रीय पूल में गेहूं का बकाया स्टॉक भी ज्यादा था जिससे कुल स्टॉक बढ़कर सुविधाजनक स्तर पर पहुंच जाएगा।
इससे सरकार को खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के माध्यम से घरेलू प्रभाग में गेहूं की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने तथा कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप करने का अवसर मिल सकता है।
गेहूं का खुला बाजार भाव इस बार 2600 से 3000 रुपए प्रति क्विंटल के बीच रहने की उम्मीद है। पिछले साल की तुलना में इस बार गेहूं की सरकारी खरीद में भारी बढ़ोत्तरी हो रही है। पंजाब, हरियाणा एवं मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में खरीद तेजी से बढ़ी है।
गत वर्ष 1 अप्रैल को केन्द्रीय पूल में महज 75 लाख टन गेहूं का बकाया स्टॉक मौजूद था जो इस वर्ष बढ़कर 118.70 लाख टन पर पहुंच जाएगा। यदि घरेलू खपत में थोड़ी बहुत बढ़ोत्तरी होती है तब तक अंकुश लगाने में सरकार को सफलता मिल सकती है।
गेहूं उत्पादों की खपत के पैटर्न में भी कुछ बदलाव देखा जा रहा है। पिछले दो साल से गेहूं पर भंडारण सीमा लागू थी और इसका निर्यात भी बंद था फिर भी कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बना रहा। इस वर्ष गेहूं की उपलब्धता बेहतर होने से कीमतों में जोरदार तेजी आना मुश्किल लगता है।
