उत्तरी भारत में कॉटन यार्न का भाव नरम

05-Jun-2026 12:14 PM

लुधियाना। कमजोर निर्यात मांग एवं सीमित घरेलू खपत के कारण उत्तरी भारत में कॉटन यार्न का भाव नरम पड़ गया है। लुधियाना तथा दिल्ली में इसकी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

इसी तरह रूई के आयात को शुल्क मुक्त किए जाने तथा खरीदारों द्वारा लिवाली में कम दिलचस्पी दिखाए जाने के कारण पानीपत में रिसाइकिल्ड कॉटन एवं सीसी यार्न का भाव कमजोर पड़ गया। लेकिन रूई के दाम में काफी हद तक स्थिरता देखी गई और शुल्क समाप्ति का बाजार पर विशेष असर नहीं देखा गया। 

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार चीन, बांग्ला देश एवं वियतनाम जैसे प्रमुख आयातक देशों में भारतीय, कॉटन यार्न की मांग आगे भी कुछ कमजोर रहने की संभावना है क्योंकि वहां ऊर्जा संकट के कारण टैक्सटाइल उद्योग की गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। इधर घरेलू प्रभाग में सीजनल प्रभाव के कारण यार्न की मांग कमजोर पड़ गई है।

भारत रूई एवं कॉटन यार्न का एक अग्रणी उत्पादक देश है। सरकार ने 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक रूई के आयात को सीमा शुल्क से मुक्त कर दिया है। इससे कॉटन यार्न एवं फैब्रिक्स के साथ-साथ वस्त्र परिधानों के लागत खर्च में कुछ कमी आने की संभावना है। वैश्विक मांग मजबूत होने पर कॉटन यार्न के दाम में सुधार आ सकता है।