लालमिर्च एवं जीरा के कमजोर प्रदर्शन से मसालों के निर्यात में गिरावट

05-Jun-2026 11:53 AM

कोच्चि। वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारत से मसालों के निर्यात में मात्रा एवं आमदनी की दृष्टि से क्रमश: 4 प्रतिशत एवं 6 प्रतिशत की गिरावट आ गई। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मांग कमजोर रहने तथा प्रतिस्पर्धा बढ़ने से खासकर लालमिर्च एवं जीरा जैसे महत्वपूर्ण मसालों का निर्यात घट गया। 

मसाला बोर्ड के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि 2024-25 में मसालों के निर्यात से 4.72 अरब डॉलर की आमदनी हुई थी जो 2025-26 में 6 प्रतिशत घटकर 4.43 अरब डॉलर रह गई।

इसी तरह मसालों की निर्यात मात्रा भी 17.99 लाख टन से 4 प्रतिशत गिरकर 17.34 लाख टन रह गई। लेकिन भारतीय मुद्रा की दृष्टि से मसालों की निर्यात आय केवल 2 प्रतिशत घट सकी और इसका आंकड़ा 2024-25 के 39,994 करोड़ रुपए से गिरकर 2025-26 के वित्त वर्ष में 39,140 करोड़ रुपए रह गया।

ऑल इंडिया स्पाइसेज एक्सपोर्टर्स फोरम के चेयरमैन का कहना है कि अमरीका में ऊंचे स्तर का सीमा शुल्क लागू होने तथा एशियाई देशों में मांग कमजोर रहने से भी मसालों का निर्यात प्रभावित हुआ। चीन में लालमिर्च एवं जीरा का बेहतर उत्पादन होने से भारत के लिए चुनौती बढ़ गई।

मात्रा और आमदनी की दृष्टि से सबसे प्रमुख मसाला- लालमिर्च का निर्यात प्रदर्शन कमजोर रहा क्योंकि चीन तथा बांग्ला देश में इसकी मांग कमजोर रही। इसकी निर्यात आय 1.34 अरब डॉलर से 12 प्रतिशत घटकर 1.17 अरब डॉलर पर अटक गई।

इसी तरह जीरा का निर्यात 2.29 लाख टन से 14 प्रतिशत घटकर 1.96 लाख टन पर सिमट गया जबकि इससे प्राप्त होने वाली आमदनी भी 73.20 करोड़ डॉलर से 28 प्रतिशत घटकर 52.422 करोड़ डॉलर पर आ गई। दूसरी ओर छोटी एवं बड़ी इलायची के निर्यात में शानदार बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।