उत्तर प्रदेश में गन्ना का सैप पिछले स्तर पर ही स्थिर रखने का निर्णय
18-Feb-2025 04:01 PM
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के लिए गन्ना के राज्य समर्थित मूल्य (सैप) में कोई बढ़ोत्तरी नहीं करने तथा इसे 2023-24 सीजन के स्तर पर ही बरकरार रखने का निर्णय लिया गया है। सरकारी निर्णय के बाद अब उत्तर प्रदेश में गन्ना का सैप 370 रुपये प्रति क्विंटल पर ही कायम रहेगा।
हालांकि पंजाब-हरियाणा एवं उत्तराखंड में ऊंचे सैप का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश के किसान भी गन्ना के सैप में भारी बढ़ोत्तरी करने और इसे 400 रुपए प्रति क्विंटल से ऊंचा नियत करने की जोरदार मांग कर रहे थे
लेकिन चीनी मिलों ने अपनी कठिनाइयों एवं चुनौतियों से सरकार को अवगत करवाते हुए गन्ना के सैप को स्थिर रखने का अनुरोध किया था जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया।
17 फरवरी 2025 को उत्तर प्रदेश में कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण मीटिंग में कुल 10 फसलों को मंजूरी दी गई जिसमें गन्ना के सैप को यथावत रखने का प्रस्ताव भी शामिल था। इसका मतलब यह हुआ कि चीनी मिलों को इस बार गन्ना की खरीद पर किसी अतिरिक्त मूल्य का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
ध्यान देने की बात है कि 2023-24 के मार्केटिंग सीजन हेतु राज्य में गन्ना का सैप 20 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाया गया था जिससे अगैती प्रजातियों का सैप 350 रुपए से बढ़कर 370 रुपए प्रति क्विंटल हो गया था।
इसी तरह सामान्य किस्म के गन्ने का सैप 340 रुपए से बढ़कर 360 रुपए प्रति क्विंटल तथा अवशिष्ट- श्रेणी के गन्ना का सैप 335 रुपए से बढ़कर 355 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया था। वर्ष 2022 में भी गन्ना के सैप में 25 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया था।
दरअसल प्रतिकूल मौसम एवं कीड़ों-रोगों के प्रकोप से इस बार उत्तर प्रदेश में गन्ना की फसल प्रभावित हुई है। इसके फलस्वरूप राज्य में केवल गन्ना की अवैध उपज दर में कमी आई है बल्कि गन्ना से चीनी की रिकवरी दर भी घट गई है।
इससे चीनी मिलों को काफी कठिनाई होने लगी है। सरकार से गन्ना के सैप पर निर्णय लेते समय इन चुनौतियों पर ध्यान देना का आग्रह किया गया था। उत्तर प्रदेश में गन्ना की कमी के कारण अनेक चीनी मिलों के नियत समय से पूर्व ही बंद हो जाने की आशंका है।
