उड़द के बिजाई क्षेत्र एवं उत्पादन में गिरावट आने की संभावना
29-Jul-2025 03:56 PM
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन के लिए उड़द का पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 2.64 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि 25 जुलाई तक इसका उत्पादन क्षेत्र 16.60 लाख हेक्टेयर रहा जो गत वर्ष के क्षेत्रफल 17.80 लाख हेक्टेयर से 6.75 प्रतिशत कम था।
पिछले कुछ वर्षों के दौरान उड़द के बिजाई क्षेत्र में 50 प्रतिशत की जोरदार गिरावट आई है। इसका रकबा 2018-19 के सीजन में उछलकर 47.26 लाख हेक्टेयर के शीर्ष स्तर पर पहुंचा था जो 2024-25 तक आते-आते लुढ़ककर 21 लाख हेक्टेयर रह गया।
आरम्भिक संकेतों से पता चलता है कि चालू खरीफ सीजन के दौरान उड़द के बिजाई क्षेत्र में कमी आएगी और अत्यधिक वर्षा के कारण फसल को हो रहे नुकसान से इसके उत्पादन में भी गिरावट आ सकती है।
लेकिन व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में उड़द के दाम पर ज्यादा असर नहीं पड़ना चाहिए क्योंकि म्यांमार एवं ब्राजील से 31 मार्च 2026 तक इसका शुल्क मुक्त आयात जारी रहेगा। म्यांमार से भारी मात्रा में उड़द का आयात हो रहा है।
भारत में उड़द का आयात 2023-24 के वित्त वर्ष में 6.24 लाख टन दर्ज किया गया था जो 2024-25 में बढ़कर 8.20 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यानी अप्रैल-जून 2025 के दौरान भारत में करीब 1.96 लाख टन उड़द का आयात किया गया जो गत वर्ष की इसी अवधि के आयात 1.99 लाख टन से कुछ कम है।
बोल्ड क्वालिटी की आयातित उड़द का भाव वर्तमान समय में चेन्नई में 7500 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है। अक्टूबर 2024 में यह 9400 रुपए प्रति क्विंटल के उच्च स्तर पर चल रहा था जो 15 जुलाई तक आते-आते घटकर 7100 रुपए प्रति क्विंटल रह गया।
इसके बाद इसमें कुछ सुधार आने लगा। केन्द्र सरकार ने उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2024-25 सीजन के 7400 रुपए प्रति क्विंटल से 400 रुपए बढ़ाकर 2025-26 सीजन के लिए 7800 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है
लेकिन फिर भी इस महत्वपूर्ण दलहन की खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घटने के संकेत मिल रहे हैं। उड़द की बिजाई का आदर्श समय जल्दी ही समाप्त होने वाली है।
