ऊंचे बाजार भाव से गेहूं की सरकारी खरीद प्रभावित होने की आशंका

21-Mar-2025 08:31 PM

नई दिल्ली। यद्यपि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा गुजरात जैसे राज्यों में केन्द्रीय बफर स्टॉक के लिए गेहूं खरीद की प्रक्रिया औपचारिक तौर पर आरंभ हो चुकी है लेकिन थोक मंडियों में प्रचलित ऊंचे मूल्य को देखते हुए सरकारी क्रय केन्द्रों पर किसान अपना गेहूं लाने से हिचक सकते हैं।

गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य इस बार 150 रुपए बढ़ाकर रूपए 2425 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है और मध्य प्रदेश एवं राजस्थान जैसे प्रांतों में इससे ऊपर अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा भी की गई है।

मध्य प्रदेश में किसानों को 2600 रुपए प्रति क्विंटल का भाव प्राप्त होगा क्योंकि वहां 175 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस दिया जाएगा। 

असली समस्या उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार एवं महाराष्ट्र जैसे राज्यों में उत्पन्न होने की आशंका है जहां केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की सरकारी खरीद होती है।

यदि प्राइवेट व्यापारी, फ्लोर मिलर्स एवं बहुराष्ट्रीय प्रतिष्ठान किसानों को इससे ऊंचे दाम पर ऑफर देते हैं तो सरकारी खरीद की गति धीमी पड़ सकती है।

पंजाब- हरियाणा में मंडी टैक्स ऊंचा होने से प्राइवेट फर्में वहां गेहूं की खरीद का ज्यादा प्रयास नहीं करती है इसलिए सरकारी एजेंसियों को अधिकांश स्टॉक खरीदने में सफलता मिल जाती है। अन्य प्रांतों में मंडी टैक्स अपेक्षाकृत कम लगता है। 

पिछले तीन साल का अनुभव बताता है कि गेहूं की सरकारी खरीद नियत लक्ष्य से बहुत कम हुई। चालू वर्ष के लिए 310 लाख टन की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो विशाल उत्पादन को देखते हुए काफी हद तक व्यावहारिक प्रतीत होता है।

यदि नियत लक्ष्य हासिल हो जाता है तो वर्ष 2021 के बाद यह पहला अवसर होगा जब केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की खरीद 300 लाख टन के स्तर को पार कर जाएगी।

इससे सरकार काफी राहत महसूस कर सकती है। लेकिन इसके लिए यह आवश्यक है कि गेहूं का थोक मंडी भाव न्यूतनम समर्थन मूल्य से नीचे रहे।