विभिन्न कारणों से आगामी खरीफ सीजन में मक्का का उत्पादन घटने की संभावना
09-May-2026 12:55 PM
नई दिल्ली। थोक मंडी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी नीचे होने, अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर रहने तथा एथनॉल के सम्बन्ध में सरकारी नीति के अनिश्चित होने से आगामी खरीफ सीजन के दौरान मक्का की खेती के प्रति भारतीय किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घटने की संभावना है जिससे इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण मोटे अनाज के उत्पादन में कमी आ सकती है।
व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि वर्षा का अभाव होने पर मक्का की औसत उपज दर घट सकती है जबकि बिजाई क्षेत्र में कमी आने से इसके कुल उत्पादन में और भी गिरावट आने की आशंका रहेगी। इस बार उर्वरकों का भी कुछ अभाव रहने की संभावना है। यदि मक्का के सकल उत्पादन में 10-15 प्रतिशत की गिरावट आ जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी। यदि उत्पादन कमजोर रहा तो पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्य हासिल करने के लिए देश में मक्का अथवा एथनॉल के आयात की आवश्यकता महसूस हो सकती है।
पिछले खरीफ सीजन में मक्का के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई थी और कुछ इलाकों में किसानों ने सोयाबीन तथा कपास के बजाए मक्का की खेती को प्राथमिकता दी थी क्योंकि उसे एथनॉल निर्माण में इसकी मांग एवं खपत बढ़ने तथा कीमत सुधरने की उम्मीद थी। लेकिन बाजार भाव नीचे रहने से किसानों को घोर निराशा हो रही है। दूसरी ओर सोयाबीन एवं मूंगफली सहित अन्य प्रमुख तिलहन के दाम में भारी इजाफा हुआ है जिससे इसकी बिजाई में किसानों की दिलचस्पी बढ़ने की उम्मीद है। इसका असर मक्का के क्षेत्रफल पर पड़ सकता है।
मोटे अनुमान के अनुसार यदि मौसम की हालत सामान्य रही तब भी मक्का के घरेलू उत्पादन में 30-40 लाख टन की गिरावट आ सकती है जबकि अल नीनो का ज्यादा प्रकोप होने पर उत्पादन में 20-30 लाख टन तक की अतिरिक्त कमी आ सकती है। इससे आगामी महीनों के दौरान मक्का की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल रहने तथा कीमत मजबूत होने की संभावना बन सकती है।
पिछले कुछ वर्षों से मक्का की खेती को काफी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके फलस्वरूप इसका घरेलू उत्पादन 2024-25 में 434 लाख टन पर पहुंचा जबकि 2025-26 के सीजन में 500 लाख टन के करीब पहुंचने का अनुमान है। 2026-27 के खरीफ सीजन में मक्का का उत्पादन घटने पर एथनॉल निर्माताओं की कठिनाई बढ़ सकती है।
