विभिन्न खरीफ फसलों के उत्पादन क्षेत्र में घट-बढ़ होने की संभावना
16-Apr-2025 12:17 PM
नई दिल्ली। हालांकि प्रमुख खरीफ फसलों की खेती जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा के साथ आरंभ होगी लेकिन पिछले साल के मुकाबले इस बार इसके उत्पादन क्षेत्र में कितनी घट-बढ़ होगी इसका मोटा अनुमान विभिन्न कारकों के आधार पर लगाया जा सकता है।
कीमतों के प्रचलित रूख, विदेशों से होने वाले आयात, भारत से होने वाले निर्यात तथा बाजार की अवधारणा के आधार पर जो अनुमान लगाया जा रहा है उससे पता चलता है कि वर्ष 2024 के मुकाबले 2025 के खरीफ सीजन में धान, सोयाबीन, मूंगफली एवं कपास के उत्पादन क्षेत्र में कमी आ सकती है।
मक्का, बाजरा, मूंग एवं तिल के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हो सकती है जबकि ज्वार, तुवर, उड़द एवं गन्ना का क्षेत्रफल सामान्य रहने की संभावना है। इस बार मानसून की बारिश भी अच्छी होने की उम्मीद है।
धान का भाव पूरे सीजन में नरम रहा है और ज्वार की कीमतों में भी कोई खास उतार-चढ़ाव नहीं देखा जा रहा है। सोयाबीन एवं मूंगफली का थोक मंडी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी नीचे चल रहा है और रिकॉर्ड सरकारी खरीद के बावजूद इसके दाम में तेजी का माहौल नहीं बन सका।
इससे किसानों में असंतोष है और वे इसकी बिजाई में कटौती कर सकते हैं। कमोबेश यही स्थिति कपास की है। इसका मंडी भाव किसानों की उम्मीद से काफी नीचे रहा। सरकारी एजेंसी द्वारा लगभग 100 लाख गांठ कपास की खरीद की गई है मगर मंडियों में कोई तेजी-मजबूती नहीं देखी जा रही है।
मोटे अनाजों के संवर्ग में मक्का एवं बाजरा के बिजाई क्षेत्र में वृद्धि होने की उम्मीद है। घरेलू प्रभाग में मक्का की मांग मजबूत बनी हुई है और इसलिए किसानों को आकर्षक वापसी हासिल हो रही है।
बाजरा का दाम भी किसानों की दृष्टि से लाभप्रद स्तर पर रहा है लेकिन ज्वार की कीमतों में कोई खास इजाफा नहीं हुआ। इसका रकबा लगभग सामान्य रहने की संभावना है।
खरीफ सीजन की तीनों प्रमुख दलहन फसलों- तुवर, उड़द एवं मूंग का भाव पहले आकर्षक स्तर पर चल रहा था मगर बाद में तेजी से घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी नीचे आ गया। तुवर एवं उड़द के शुल्क मुक्त आयात की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी गई है। मूंग के आयात पर प्रतिबंध लगा हुआ है।
तिल का क्षेत्रफल बढ़ने के आसार हैं क्योंकि इसके उत्पादकों को अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। नकदी फसलों में गन्ना का रकबा या तो सामान्य रह सकता है या कुछ बढ़ सकता है।
चीनी का दाम ऊंचा चल रहा है और एथनॉल निर्माण में गन्ना का उपयोग बढ़ सकता है। 2025-26 के सीजन हेतु सरकार द्वारा घोषित किए जाने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर भी कुछ फसलों का बिजाई क्षेत्र निर्भर कर सकता है। इसकी घोषणा जल्दी ही होने की संभावना है।
