वर्ष 2024 का समय इलायची उत्पादकों के लिए अच्छा नहीं रहा

27-Dec-2024 04:06 PM

इडुक्की । प्रतिकूल मौसम तथा प्राकृतिक आपदाओं एवं कीड़ों-रोगों के प्रकोप से फसल को हुए भारी नुकसान के कारण छोटी इलायची की पैदावार एवं उपज दर में जोरदार गिरावट आई है और इसलिए उत्पादक वर्ष 2024 को इलायची के उत्पादन की दृष्टि  से सबसे खराब वर्षों में से एक मानते हैं। 

उत्पादकों के अनुसार 2024 का आरंभ तो उत्साहवर्धक ढंग से हुआ था जब उत्पादक क्षेत्रों में काफी अच्छी बारिश हुई थी। उसके बाद मई तक न केवल वर्षा का अभाव देखा गया बल्कि तापमान भी काफी ऊंचा रहा।

इससे इलायची की फसल तो  काफी अच्छी हुई। पांच एकड़ से कम बागान वाले छोटे एवं सीमांत किसानों के पास सिंचाई की सुविधा नहीं होने से फसल काफी हद तक सूख गई।

बड़े-बड़े उत्पादकों को भी इस भयंकर सूखे से अपनी फसल को बचाने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ा। इससे उसकी फसल भी 20-30 प्रतिशत तक क्षतिग्रस्त हो गई। 

जून से दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश का दौर शुरू हुआ तो इलायची की फसल पर फंगल रोग का प्रकोप भी बढ़ने लगा। इसके फलस्वरूप इलायची की उपज दर में 30-40 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका पैदा हो गई।

उद्योग समीक्षकों के अनुसार वर्ष 2023 में लगभग 25 हजार टन इलायची का उत्पादन हुआ था जबकि वर्ष 2024 में यह घटकर 15 हजार टन के करीब रह जाने की संभावना है।

केरल के सबसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्र- इडुक्की जिले में खराब मौसम के कारण लगभग 30 प्रतिशत फसल क्षतिग्रस्त हो गई।

उत्पादकों के लिए अच्छी बात यह रही कि छोटी (हरी) इलायची का जो भाव जनवरी में औसतन 1650 रुपए प्रति किलो चल रहा ता वह दिसम्बर तक आते-आते उछलकर 2950 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया।

इलायची के उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले इस बार 40-50 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना है मगर इसका भाव ऊंचा रहने की उम्मीद है।

अगले साल भी इसका भाव ऊंचा रहेगा। कुछ समीक्षकों का मानना है कि अप्रैल 2025 तक यह बढ़कर 3500-3800 रुपए प्रति किलो के उच्च स्तर पर पहुंच सकता है।

यदि वसंतकाल में सही समय पर अच्छी वर्षा हो गई तो जुलाई-अगस्त में आने वाली नई फसल का बेहतर उत्पादन हो सकता है और तब दूसरी छमाही के इलायची के दाम में थोड़ी नरमी आ सकती है।