वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 30 प्रतिशत एथनॉल के मिश्रण का नया लक्ष्य निर्धारित होने की उम्मीद
15-Apr-2025 04:26 PM
नई दिल्ली। चालू वर्ष में मार्च तक पेट्रोल में एथनॉल का मिश्रण 20 प्रतिशत तक पहुंचने के कारण अब सरकार वर्ष 2030 तक इस मिश्रण का लक्ष्य बढ़ाकर 30 प्रतिशत निर्धारित करने पर विचार कर रही है।
इससे जहां एक ओर पेट्रोलियम के आयात पर होने वाले विशाल खर्च में कमी आएगी और हरित ऊर्जा का उपयोग बढ़ने से पर्यावरण प्रदूषण का खतरा घटेगा वहीं दूसरी तरफ गन्ना, चावल और मक्का के उत्पादकों को बेहतर वापसी हासिल करने का अवसर भी मिलेगा।
हालांकि आरंभिक चरण में वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल के मिश्रण का ही लक्ष्य नियत किया गया था लेकिन बाद में इसे आगे खिसकाकर 2024-25 के मार्केटिंग सीजन हेतु नियत किया गया।
वर्तमान मार्केटिंग सीजन नवम्बर 2024 में आरंभ हो चुका है जो अक्टूबर 2025 तक चलेगा। इस बीच मार्च 2025 में ही पेट्रोल में एथनॉल का मिश्रण बढ़कर 20 प्रतिशत के करीब पहुंच गया।
इससे पूर्व 2023-24 के मार्केटिंग सीजन में औसतन 14.6 प्रतिशत एथनॉल का मिश्रण हुआ था जबकि 2022-23 के सीजन में मिश्रण का स्तर 12.06 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया था।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि अंतर-मंत्रालयी पैनल की बैठक में पेट्रोल एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्य बढ़ाने के मुद्दे पर गंभीरतापूर्वक विचार करने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा लेकिन उम्मीद की जा रही है कि अगले पांच वर्षों में 30 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य हासिल हो सकता है।
हालांकि 2024-25 सीजन के दौरान गन्ना का घरेलू उत्पादन उम्मीद से काफी कम हुआ जिससे एथनॉल निर्माण में इसका उपयोग अपेक्षित स्तर तक पहुंचने की संभावना नहीं है लेकिन फिर भी इसकी मात्रा 2023-24 के सीजन से अधिक रहेगी।
इसी तरह अनाज आधारित डिस्टीलरीज में एथनॉल का बेहतर उत्पादन होने की उम्मीद है क्योंकि वहां चावल और मक्का के इस्तेमाल में काफी बढ़ोत्तरी हो रही है।
सरकार ने अपने गोदामों से एथनॉल निर्माताओं को 22,500 रुपए प्रति टन के रियायती मूल्य पर 24 लाख टन चावल का स्टॉक आवंटित किया है जबकि मक्का की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति भी सुगम रहने की उम्मीद है।
