विशाल आयात से तुवर की आपूर्ति बढ़ने के कारण कीमतों पर दबाव

30-Jul-2025 03:52 PM

मुम्बई। म्यांमार तथा अफ्रीकी देशों से वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में अरहर (तुवर) का रिकॉर्ड आयात हुआ और 2025-26 के वित्त वर्ष में भी इसका सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

अभी तक म्यांमार से इसका भारी आयात हो रहा है जबकि अगले महीने (अगस्त) से अफ्रीकी देशों में इसकी नई फसल की कटाई-तैयारी शुरू हो जाएगी और सितम्बर से भारतीय बंदरगाहों पर वहां से माल आने लगेगा। भारत में 31 मार्च 2026 तक तुवर का शुल्क मुक्त आयात होता रहेगा। अफ्रीकी देशों में इस बार फसल संतोषजनक बताई जा रही है। 

घरेलू प्रभाग में विदेशों से आयातित सस्ती तुवर का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने से इसकी कीमतों पर दबाव पड़ रहा है और इसकी खेती में किसानों की दिलचस्पी घट रही है।

अरहर का उत्पादन क्षेत्र कर्नाटक में 15.42 लाख हेक्टेयर से घटकर 13.01 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 11.60 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 11.44 लाख हेक्टेयर, गुजरात में 1.96 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.55 लाख हेक्टेयर तथा  आंध्र प्रदेश में 82 हजार हेक्टेयर से घटकर 68 हजार हेक्टेयर रह गया। केवल तेलंगाना ही ऐसा राज्य है जहां तुवर का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 3.65 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस बार 4.21 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है। 

लातूर के एक मिलर का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर तुवर के बिजाई क्षेत्र में इस बार 5-10 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है क्योंकि कुछ क्षेत्रों में किसानों द्वारा मक्का सहित कुछ अन्य फसलों की खेती को प्राथमिकता दी जा रही है।

आई ग्रेन इंडिया के डयरेक्टर राहुल चौहान भी इससे सहमत है। उनका कहना है कि पिछले साल की तुलना में अब तुवर का भाव करीब 40 प्रतिशत नीचे आ गया है और इससे किसान काफी हतोत्साहित हो रहे हैं। सरकार द्वारा तुवर के न्यूनतम समर्थन मूल्य में किया गया 450 रुपए प्रति क्विंटल का भारी इजाफा भी तुवर उत्पादकों का हौसला बढ़ाने में विफल साबित हो रहा है। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत में 2023-24 के दौरान 7.71 लाख टन तुवर का आयात हुआ था जो 2024-25 में तेजी से उछलकर 12.23 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

सितम्बर से अफ्रीकी तुवर का आयात जोर पकड़ लेगा जो कमोबेश जनवरी-फरवरी तक बरकरार रहेगा। इस बीच दिसम्बर से घरेलू फसल आने लगेगी और फरवरी 2026 के बाद म्यांमार में नया माल आना शुरू हो जाएगा।