वैश्विक आपूर्ति में कमी से नारियल तेल का भाव शीर्ष पर
28-Jul-2025 03:45 PM
कोच्चि। पिछले कुछ महीनों से नारियल, कोपरा एवं नारियल तेल के घरेलू बाजार मूल्य में जोरदार तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ है जिसका प्रमुख कारण वैश्विक स्तर पर इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता में कमी आना तथा मौसम का प्रतिकूल होना बताया जा रहा है।
पिछले एक साल के दौरान घरेलू प्रभाग में पाम तेल, सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल एवं सरसों के दाम में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। इसी तरह नारियल तेल का भाव जनवरी 2025 से अब तक लगभग दोगुना बढ़ चुका है।
केरल में इसका खुदरा मूल्य उछलकर 460 रुपए प्रति किलो के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया है जो तिल तेल के दाम से भी ऊंचा है जबकि परम्परागत रूप से तिल का तेल सबसे महंगा माना जाता है।
इंडोनेशिया एवं फिलीपींस को दुनिया में कोपरा तथा नारियल तेल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश माना जाता है। लेकिन अल नीनो मौसम चक्र के कारण दक्षिण-पूर्व एशिया के इन दोनों देशों में 2023-24 के सीजन (जुलाई-जून) के दौरान नारियल के बागान को भारी नुकसान हुआ और इसके उत्पादन में भारी गिरावट आ गई।
चूंकि नारियल को परिपक्व होने में करीब एक साल का समय लग जाता है इसलिए उत्पादन में गिरावट का असर अब देखा जा रहा है। कई बागानों में नारियल के पेड़ काफी पुराने हो गए हैं और उसकी उत्पादकता घट गई है।
इधर भारत में नारियल तेल के उत्पादन में स्थिरता या गिरावट देखी जा रही है। देश में लगभग 5.70 लाख टन नारियल तेल का वार्षिक उत्पादन होता है जिसमें से 3.90 लाख टन का उपयोग खाद्य तेल के रूप में और शेष 1.80 लाख टन का इस्तेमाल कॉस्मेटिक्स तथा अन्य उद्योगों में होता है।
खाद्य तेल के रूप में नारियल तेल का उपयोग मुख्यतः केरल में होता है जबकि तमिलनाडु में भी सीमित मात्रा में इसका प्रयोग किया जाता है।
भारत में खाद्य तेलों की कुछ खपत में पाम तेल, सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल की भागीदारी 72 प्रतिशत के करीब रहती है जिसका विशाल आयात विदेशों से किया जाता है।
केरल पहले नारियल का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य था मगर अब वह तमिलनाडु एवं कर्नाटक से पिछड़कर तीसरे नंबर पर आ गया है। केरल में नारियल तेल की प्रति व्यक्ति औसत आर्थिक खपत महज 2 लीटर की है जबकि पाम तेल की खपत 4 लीटर की है।
भारत में खपत कम होने से केरल को छोड़कर अन्य राज्यों के आम उपभोक्ताओं को नारियल तेल की कीमतों में आई जोरदार तेजी से कोई खास परेशानी नहीं हो रही है मगर उद्योगों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
