वैश्विक चावल निर्यात बाजार में भारत का वर्चस्व बरकरार रखने के आसार
27-Dec-2024 06:09 PM
नई दिल्ली । भारत पिछले 10-12 वर्षों से संसार में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना हुआ है और आगामी वर्षों में भी वैश्विक निर्यात बाजार पर इसका वर्चस्व बरकरार रहने के प्रबल आसार हैं।
चावल के निर्यात में थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान, अमरीका, म्यांमार एवं अन्य आपूर्तिकर्ता देश भारत से मीलों पीछे हैं।
ध्यान देने की बात है कि पिछले साल जुलाई-अगस्त में जब केन्द्र सरकार ने गैर बासमती सफेद चावल के व्यापारिक निर्यात पर प्रतिबंध और सेला चावल पर 20 प्रतिशत का निर्यात शुल्क लगाया था और साथ ही साथ बासमती चावल के लिए 1200 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) लागू किया था
तब देश से चावल का निर्यात प्रदर्शन प्रभावित हुआ था लेकिन फिर भी भारत दुनिया का सबसे प्रमुख चावल निर्यातक देश बना रहा। यह अलग बात है कि इसकी निर्यात मात्रा में काफी कमी आ गई थी।
अब सब कुछ सामान्य हो गया है। सफेद चावल तथा सेला चावल का शुल्क मुक्त एवं नियंत्रण मुक्त निर्यात होने लगा है।
बासमती चावल का मेप समाप्त किया जा चुका है। कुछ दिनों के लिए सफेद गैर बासमती चावल के लिए 490 डॉलर प्रति टन का मेप लागू हुआ था मगर उसे भी हटाया जा चुका है।
घरेलू प्रभाग में चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी हुई है और निर्यातकों को शिपमेंट के लिए चावल का पर्याप्त स्टॉक प्राप्त हो रहा है।
अमरीकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपए का भारी अवमूल्यन होने से निर्यातकों को चावल का निर्यात ऑफर मूल्य प्रतिस्पर्धी स्तर पर रखने में कोई कठिनाई नहीं हो रही है।
जबकि आकर्षक मूल्य स्तर के कारण अफ्रीका तथा एशिया के अनेक देश भारतीय चावल की खरीद में जबरदस्त दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसका सिलसिला आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। भारतीय चावल सबसे सस्ते दाम पर उपलब्ध रहता है।
निर्यातकों का कहना है कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान नियंत्रणों-प्रतिबंधों के कारण भारत ने चावल का अपना जो बाजार गंवा दिया था वह चालू वित्त वर्ष में काफी हद तक तथा अगले वित्त वर्ष के दौरान पूरी तरह दोबारा हासिल कर लेगा।
यदि कोई प्रतिकूल नीतिगत निर्णय सामने नहीं आया तो भारत से चावल का वार्षिक निर्यात पुनः उछलकर 200 लाख टन से ऊपर पहुंच जाएगा जो अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक होगा।
