15 प्रतिशत तक नमी के अंश वाले सोयाबीन की खरीद की अनुमति देने का निर्णय
15-Nov-2024 07:45 PM
नई दिल्ली । केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत खरीदे जाने वाले सोयाबीन के लिए गुणवत्ता नियमों में कुछ ढील प्रदान की है। अभी तक किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर ऐसे सोयाबीन की ही खरीद हो रही थी जिसमें नमी का अंश अधिकतम 12 प्रतिशत तक उपस्थित रहता था लेकिन अब 15 प्रतिशत तक नमी की मौजूदगी वाले तिलहन (सोयाबीन) की भी खरीद करने की अनुमति प्रदान की गई है।
कृषि मंत्रालय ने गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान और कर्नाटक के मुख्य सचिव को प्रेषित पत्र में कहा है कि गुणवत्ता मानकों में यह रियायत केवल एक बार (चालू सीजन) के लिए दी गई है।
चूंकि निर्धारित नियमों के अंतर्गत अधिकतम 12 प्रतिशत तक नमी के अंश वाले सोयाबीन की खरीद हो सकती है इसलिए इस बार 15 प्रतिशत तक नमी वाले तिलहन की खरीद से जो मात्रात्मक नुकसान होगा उसका भर सम्बन्धित राज्य सरकारों को वहन करना पड़ेगा और केन्द्र उसका खर्च नहीं उठाएगा।
केन्द्र सरकार की प्राधिकृत एजेंसियां- नेफेड तथा एनसीसीएफ को हिदायत दी गई है कि वे 12 प्रतिशत तक की नमी के आधार पर सोयाबीन के मूल्य का भुगतान करे और शेष अंश के भुगतान के लिए राज्य सरकारों से राशि वसूल करे। इसमें नमी सूखने के बाद सोयाबीन के वजन में आने वाली नमी के कारण होने वाली क्षति की भरपाई भी शामिल होगी।
सरकार ने उपरोक्त राज्यों में एफएक्यू श्रेणी के सोयाबीन की खरीद 4892 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने की स्वीकृति प्रदान की है जिसमें नमी का अंश 8 से 12 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए।
पत्र में कहा गया है कि प्रांतीय एजेंसियां किसानों के व्यापक हित को देखते हुए सोयाबीन का पूरा एमएसपी भुगतान करेंगी जबकि केन्द्रीय एजेंसियां उसे 12 प्रतिशत नमी के आधार पर ही समर्थन मूल्य की राशि प्रदान करेंगी।
सोयाबीन की सरकारी खरीद आरंभ हो गई है मगर नमी पर विवाद के कारण अब तक इसकी गति काफी धीमी रही थी। विभिन्न राज्यों की ओर से प्राप्त आग्रह को स्वीकार करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने अब खरीद की रफ्तार बढ़ाने के लिए रास्ता साफ कर दिया है।
