1950 के बाद पहली बार सुपर अल नीनो के खतरे की आशंका

01-Jul-2026 07:48 PM

सिडनी। ऑस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो (बोम) की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक खतरनाक सुपर अल नीनो तेजी से आकार ले रहा है जिसका संकेत इस हकीकत से सामने आया है कि ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में समुद्र तल का तापमान सामान्य अल नीनो के स्तर से काफी ऊपर जाने लगा है और वातावरण की स्थिति उसके अनुकूल होने लगी है। 

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह अल नीनो वर्ष 1950 के बाद का सबसे ज्यादा शक्तिशाली एवं घातक मौसम चक्र साबित हो सकता है जो दुनिया के अनेक देशों को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है और इसका असर लम्बे समय तक कायम रह सकता है। वैश्विक स्तर पर मौसम एवं जलवायु की गति एवं स्थिति में बाधा डालने वाले इस सुपर अल नीनो की चाल एवं ताकत पर गहरी नजर रखी जा रही है। 

एक विशेषज्ञ के अनुसार समुद्र तल का तापमान बढ़कर एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। अल नीनो का निर्माण पहले ही हो चुका है। मध्यवर्ती ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में एसएसटी (समुद्र तल का तापमान या सरफेस टेम्परेचर) अल नीनो के आधार स्तर से ऊपर हो चुका है।

तापमान में हो रही नियमित वृद्धि के साथ अल नीनो की शक्ति बढ़ती जा रही है जिससे आगामी समय में इसके 'सुपर' अल नीनो के रूप में परिवर्तित होने की आशंका है। यह अल नीनो पिछले 76 वर्षों में सबसे शक्तिशाली मौसम चक्र के रूप में सामने आ सकता है। 

इस सुपर अल नीनो का गंभीर और व्यापक असर दक्षिण, एशिया, दक्षिण-पूर्व एवं सुदूर-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया तथा लैटिन अमरीका पर पड़ने की आशंका है जबकि अन्य संभागों पर प्रभाव अपेक्षाकृत कम दिखेगा।

ज्यादा संभावित असर  वाले देशों में भारत भी शामिल है। भारत में मानसून की हालत अनियमित एवं अनिश्चित बनी हुई है और वर्षा की कमी से खरीफ फसलों की बिजाई काफी घट गई है। चालू माह की बारिश भारतीय कृषि क्षेत्र की दिशा एवं दशा निर्धारित करेगी।