आगामी महीनों में पाम तेल का आयात बढ़ने के आसार
13-Jun-2025 06:14 PM
मुम्बई। चालू वर्ष के आरंभ से पाम तेल का आयात कम हो रहा था। जनवरी से अप्रैल के चार महीनों तक यह सिलसिला जारी रहा और किसी भी माह में पाम तेल उत्पादों का आयात 5 लाख टन तक नहीं पहुंच सका। नवम्बर 2024 में 8.42 लाख टन पाम तेल का भारी भरकम आयात हुआ था जो दिसम्बर 2024 में घटकर 5 लाख टन पर आ गया। इसके बाद की स्थिति संतोषजनक नहीं रही।
पाम तेल का आयात जनवरी 2025 में लुढ़ककर 2.75 लाख टन, फरवरी में 3.74 लाख टन, मार्च में 4.25 लाख टन तथा अप्रैल में 3.22 लाख टन के करीब अटक गया।
इसका कारण इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड जैसे शीर्ष आपूर्तिकर्ता देशों में पाम तेल का निर्यात ऑफर मूल्य ऊंचा रहता था जिससे भारतीय आयातकों को सोयाबीन तेल का आयात बढ़ाने का प्रोत्साहन मिला क्योंकि यह अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर उपलब्ध था।
लेकिन बाद में पाम का दाम घटकर सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल से नीचे आ गया जिससे मई 2025 में इसका आयात बढ़कर 5.93 लाख टन पर पहुंच गया।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार यदि पाम तेल का निर्यात ऑफर मूल्य आकर्षक बना रहा तो जून से अगस्त की तिमाही में प्रत्येक माह इसका आयात 6-7 लाख टन के बीच हो सकता है।
मई के अंत में मलेशिया में पाम तेल का बकाया अधिशेष स्टॉक बढ़कर 19.90 लाख टन की ऊंचाई पर पहुंच गया जिससे उद्योग की चिंता बढ़ गई है और इसलिए पाम तेल की कीमतों पर दबाव पड़ने लगा है।
उद्योग समीक्षकों का मानना है कि अगले कुछ महीनों तक मलेशिया में क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का वायदा मूल्य 3900 से 4200 रिंगिट प्रति टन के बीच रह सकता है।
भारत सरकार क्रूड श्रेणी के तीनों प्रमुख खाद्य तेल- पाम तेल, सोयाबीन तेल तथा सूरजमुखी तेल पर बुनियादी आयात शुल्क को पहले ही 20 प्रतिशत से आधा घटाकर 10 प्रतिशत निर्धारित कर चुकी है जिससे भारतीय रिफाइनर्स इसका आयात बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चालू मार्केटिंग सीजन के आरंभिक सात महीनों में यानी नवम्बर 2024 से मई 2025 के दौरान भारत में केवल 33.20 लाख टन पाम तेल का आयात हुआ जो 2023-24 सीजन की समान अवधि के आयात 49.77 लाख टन से 16.47 लाख टन कम रहा।
