आईस्टा द्वारा चीनी के निर्यात कोटे में सुधार की जरूरत पर जोर

13-Aug-2025 09:16 PM

मुम्बई। ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (आईस्टा) ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया है कि चीनी का निर्यात कोटा केवल उन्ही मिलों को आवंटित किया जाए जो अपनी निजी सुविधाओं से इसका शिपमेंट करने की इच्छुक हों / एसोसिएशन के अनुसार मौजूदा सिस्टम न केवल चीनी के निर्यात को प्रभावित कर रहा है बल्कि मिलों की लाभप्रदता पर भी आघात कर रहा है। 

एसोसिएशन के मुताबिक वर्तमान कोटा प्रणाली के तहत सभी मिलों को सीमित मात्रा में चीनी की निर्यात मात्रा का आवंटन किया जाता है जो उसके पिछले उत्पादन पर आधारित होता है।

इस सिस्टम के तहत दूर-दराज की मिलों तथा निर्यात की अनिच्छुक इकाइयों को अपना निर्यात कोटा दूसरी चीनी मिलों को बेचने की अनुमति दी जाती है जिससे भारी मात्रा में  चीनी का ऐसा स्टॉक बच जाता है जिसका निर्यात शिपमेंट नहीं हो सकता है।

दूरस्थ क्षेत्रों की चीनी मिलें अन्य प्लांटों को अपना कोटा तो बेचती है मगर जब उसका निर्यात नहीं होता है तो कोटा खरीदने वाली इकाइयों के पास चीनी का स्टॉक जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है। इससे उसकी कठिनाई बढ़ जाती है। 

उल्लेखनीय है कि वर्तमान समय में चीनी का निर्यात प्रतिबंधित सूची में शामिल है और केवल सरकार द्वारा निर्धारित कोटे के अनुरूप ही इसका शिपमेंट किया जा सकता है।

2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन के लिए सरकार ने 10 लाख टन चीनी का निर्यात कोटा निर्धारित किया है और 30 सितम्बर 2025 तक इसका शिपमेंट होना है।

15 जनवरी 2024 से सी-हैवी शीरा के निर्यात पर 50 प्रतिशत का शुल्क लागू है। आईस्टा के मुताबिक भारी-भरकम शुल्क के कारण अपेक्षित मात्रा में इसका निर्यात नहीं हो रहा है जिससे मिलर्स की आमदनी प्रभावित हो रही है।