आसमान के छलावे से महाराष्ट्र के किसानों की बढ़ती है परेशानी

01-Oct-2025 01:55 PM

पुणे। पश्चिमी भारत के एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक राज्य- महाराष्ट्र में आसमान जब भी छलावा करता है तब किसान बाढ़ या सूखा के संकट में फंस जाते हैं और फिर उनके सर पर ऋण या कर्ज का भारी बोझ आ जाता है।

कई किसान इसका भार बर्दाश्त नहीं कर पाते और इसलिए आत्महत्या भी कर लेते हैं। चालू वर्ष के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में महाराष्ट्र के कुल 36 में से 30 जिलों में अत्यन्त मूसलाधार बारिश होने तथा कई क्षेत्रों में भयंकर बाढ़ आने से खेतों में खरीफ फसलें जलमग्न हो गई।

अधिशेष वर्षा और विनाशकारी बाढ़ से न केवल खरीफ फसलें क्षतिग्रस्त हुई हैं बल्कि मवेशियों, मकानों और उम्मीदों को भी भारी नुकसान हुआ है। 

महाराष्ट्र के अनेक जिलों में इस बार अत्यन्त मूसलाधार बारिश हुई जिससे लाखों हेक्टेयर भूमि में खरीफ फसलें तबाह हो गई। कई किसान इसका सदमा नहीं झेल पाए।

सोलापुर के एक गांव में अपनी फसल की बर्बादी देखकर एक किसान ने आत्महत्या कर ली। उसने बैंकों से ऋण लेकर अमरुद, नींबू एवं गन्ना की खेती की थी जो सैलाब में बर्बाद हो गई।

पिछले साल महाराष्ट्र के किसानों को सूखे के संकट का सामना करना पड़ा था जबकि इस बार भयंकर बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ रही है। पिछले सप्ताह महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में जोरदार बारिश हुई और अब भी इसका सिलसिला जारी है।

इससे खरीफ सीजन की पकी हुई फसलों को भारी क्षति हो रही है जबकि पिछैती बिजाई वाली फसल भी पानी में डूब गई है।  राज्य सरकार के आरंभिक आंकलन के अनुसार इस बार महाराष्ट्र में लगभग आधी खरीफ फसलें क्षतिग्रस्त या बर्बाद हो गई हैं। 

सितम्बर-अक्टूबर का महीना फसलों की कटाई-तैयारी की शुरुआत तथा त्यौहारों का समय होता है लेकिन इस बार महाराष्ट्र के किसानों के चेहरे पर खुशी के बजाए मायूसी देखी जा रही है।

राज्य के 30 जिलों में लगभग 70 लाख एकड़ क्षेत्र में खरीफ फसलें बर्बाद हो गई हैं। इससे किसानों पर विपत्ति का पहाड़ टूट रहा है और उसके आत्महत्या की आशंका बढ़ रही है।

विशाल क्षेत्रफल में सोयाबीन के पीछे सड़ने-गलने लगे हैं जबकि कपास के पौधों में रूई के गोले (बॉल) बर्बाद हो गए हैं। फसलें कटाई-तैयारी के चरण में थीं। इसके अलावा अन्य फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है।