आंधी-वर्षा के प्रकोप से गेहूं का उत्पादन 5-10 प्रतिशत घटने की संभावना
24-Apr-2026 03:34 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने गेहूं का घरेलू उत्पादन पिछले साल के 1179.40 लाख टन से बढ़कर इस वर्ष 1202.10 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान लगाया है लेकिन उद्योग-व्यापार समीक्षकों का मानना है कि मध्य मार्च से अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक आंधी-तूफान, बेमौसमी वर्षा एवं कहीं-कहीं ओलावृष्टि का प्रकोप रहने से फसल को नुकसान हुआ जिससे गेहूं का उत्पादन पिछले वर्ष के स्तर से भी 5-10 प्रतिशत कम हो सकता है। इसके साथ-साथ गेहूं की क्वालिटी भी खराब हुई है।
उत्पादन कम होने से गेहूं की सरकारी खरीद पर असर पड़ सकता है। पिछले तीन-चार साल से इसकी खरीद नियत लक्ष्य से काफी कम हो रही है।
इस बार 303.37 लाख टन (मध्य प्रदेश में हुई वृद्धि को छोड़कर) गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसे हासिल करने में सरकार को कठिनाई हो सकती है लेकिन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए कोई खतरा पैदा नहीं होगा क्योंकि केन्द्रीय पूल में पहले से ही इसका भारी-भरकम स्टॉक मौजूद है।
एक अग्रणी विश्लेषक के अनुसार इस बार गेहूं के बिजाई क्षेत्र में करीब 6 लाख हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी हुई और फरवरी तक फसल की हालत काफी अच्छी दिखाई पड़ रही थी।
लेकिन फसल की कटाई-तैयारी शुरू होने से ठीक पहले बेमौसमी वर्षा होने तथा आंधी-तूफान का भयंकर प्रकोप रहने से फसल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गई।
देश में 80 प्रतिशत से अधिक गेहूं का उत्पादन उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में होता है जबकि केन्द्रीय पूल में इसके संयुक्त योगदान की भागीदारी 95 प्रतिशत से ज्यादा रहती है। इन सभी राज्यों में गेहूं की फसल को प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा।
वहां गेहूं का दाना बदरंग एवं चमकहीन होने की शिकायत मिलने के बाद सरकार ने गुणवत्ता शर्तों में छूट दे दी है। एक समीक्षक के अनुसार इस वर्ष देश में 1060-1070 लाख टन गेहूं का उत्पादन हो सकता है जो पिछले सात वर्षों में सबसे कम है। अन्य विश्लेषक गेहूं का उत्पादन इससे ज्यादा 1080-1100 लाख टन होने का अनुमान लगा रहे हैं।
