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01-Oct-2026 10:47 AM
विजयवाड़ा। दक्षिण भारतीय राज्य- आंध्र प्रदेश में यद्यपि हाल के सप्ताहों के दौरान खरीफ फसलों की बिजाई में अच्छी प्रगति हुई है लेकिन फिर भी इसका रकबा गत वर्ष से करीब 2 लाख हेक्टेयर पीछे रह गया। राज्य में इस बार सही समय पर मानसून की अच्छी बारिश नहीं होने से फसलों की बिजाई की रफ्तार आरंभ से ही धीमी रही।
राज्य कृषि विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार आंध्र प्रदेश में इस वर्ष 30 सितम्बर 2026 तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 26.79 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 28.77 लाख हेक्टेयर से 1.98 लाख हेक्टेयर कम है।
गत वर्ष की तुलना में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान आंध्र प्रदेश में धान का उत्पादन क्षेत्र 15.58 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 13.88 लाख हेक्टेयर तथा मोटे अनाजों का रकबा 2.43 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.84 लाख हेक्टेयर रह गया। मोटे अनाजों में खासकर मक्का का बिजाई क्षेत्र 1.89 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.32 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जबकि बाजरा एवं रागी का क्षेत्रफल गत वर्ष के आसपास ही रहा।
दूसरी ओर वहां दलहनों का उत्पादन क्षेत्र 3.52 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.09 लाख हेक्टेयर हो गया। इसके तहत तुवर का बिजाई क्षेत्र 3.11 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 3.48 लाख हेक्टेयर तथा उड़द का उत्पादन क्षेत्र 27 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 50 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया।
तिलहन फसलों का रकबा भी गत वर्ष के 2.27 लाख हेक्टेयर से सुधरकर इस बार 2.29 लाख हेक्टेयर हो गया। इसके तहत यद्यपि मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 1.79 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.75 लाख हेक्टेयर रह गया मगर तिल, अरंडी एवं सोयाबीन के क्षेत्रफल में थोड़ी बढ़ोत्तरी हुई। लेकिन कपास का रकबा 4.73 लाख हेक्टेयर से घटकर 4.49 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।