अच्छी वर्षा के सहारे राजस्थान में खरीफ फसलों की शानदार बिजाई जारी

30-Jun-2025 01:41 PM

जयपुर। देश के पश्चिमी भाग में अवस्थित एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में इस बार मानसून की अच्छी बारिश होने तथा मौसम अनुकूल रहने से किसानों को विभिन्न खरीफ फसलों की बिजाई का समय बढ़ाने में भारी सहायता मिल रही है।

राज्य के लगभग सभी भागों में इस बार मानसून नियत समय से पहले पहुंच गया जिसमें वह सुदूर पश्चिमी क्षेत्र भी शामिल है जहां मानसून सबसे अंत में 7-8 जुलाई को पहुंचता है। खरीफ फसलों की शानदार बिजाई का अभियान अभी जारी है। 

राज्य कृषि विभाग के नवीनतम साप्तहिक आंकड़ों के अनुसार चालू वर्ष के दौरान 27 जून तक राजस्थान में खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 52.03 लाख हेक्टेयर से ऊपर पहुंच गया

जिसमें 24.54 लाख हेक्टेयर में अनाजी फसलों, 9.01 लाख हेक्टेयर में दलहनों, 8.68 लाख हेक्टेयर में तिलहनों का रकबा शामिल है। नकदी या औद्योगिक फसलों के संवर्ग में इस बार राजस्थान में 27 जून तक करीब 5.80 लाख हेक्टेयर में कपास, 2.59 लाख हेक्टेयर में ग्वार तथा 3 हजार हेक्टेयर से कुछ अधिक क्षेत्र में गन्ना की खेती पूरी हो चुकी थी। 

अनाजी फसलों में इस बार राजस्थान में धान का उत्पादन क्षेत्र 35 हजार हेक्टेयर, ज्वार का क्षेत्रफल 2.30 लाख हेक्टेयर, बाजरा का बिजाई क्षेत्र 18.74 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का रकबा 3.14 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जबकि इन फसलों की खेती अभी जोर शोर से जारी है।

दलहन फसलों में मूंग का उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 7.3 लाख हेक्टेयर के करीब पहुंच गया है जबकि मोठ का रकबा 1.12 लाख हेक्टेयर, उड़द का बिजाई क्षेत्र 25 हजार हेक्टेयर और चौला का क्षेत्रफल 29 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा है।

इसके अलावा राजस्थान में एक हजार हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में अरहर (तुवर) की खेती भी हुई है मगर वह इसके प्रमुख उत्पादक राज्यों में शामिल नहीं है। 

राजस्थान में तिलहन फसलों के संवर्ग में मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 5.77 लाख हेक्टेयर तथा सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र सुधरकर 2.61 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है। इसके अलावा तिल का रकबा भी 29 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा है।

वहां अरंडी की बिजाई शुरू हो गई है और इसका क्षेत्रफल एक हजार हेक्टेयर से ऊपर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान खरीफ कालीन बाजरा, मूंग और ग्वार का सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त है जबकि मूंगफली के उत्पादन में दूसरे एवं सोयाबीन के उत्पादन   में तीसरे नम्बर पर रहता है।

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