अफगानिस्तान को कृषि उत्पादों के निर्यात में गिरावट आने की संभावना
16-Jun-2025 10:45 AM
नई दिल्ली। हालांकि भारत सरकार ने अफगानिस्तान में तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार को अभी तक मान्यता प्रदान नहीं की है लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते काफी अच्छे बने हुए हैं। वैसे कुछ खास कारणों से भारत से अफगानिस्तान को वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान कृषि उत्पादों का निर्यात 2023-24 की तुलना में करीब 20 प्रतिशत घटकर 8.26 करोड़ डॉलर पर अटक गया जबकि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इसमें कुछ और गिरावट आने की संभावना है।
भारत से अफगानिस्तान को कृषि उत्पादों के संवर्ग में मुख्यतः ऑयल मील, तम्बाकू, मसाले, चीनी तथा प्रसंस्कृत फल (जूस सहित) आदि का निर्यात होता है। वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में 2024-25 के दौरान भारत से अफगानिस्तान को यद्यपि ऑयल मील का निर्यात बढ़कर 273.70 लाख डॉलर तथा तम्बाकू उत्पादों का निर्यात सुधरकर 159.10 लाख डॉलर पर पहुंच गया लेकिन मसालों का निर्यात घटकर 119.20 लाख डॉलर, चीनी का निर्यात गिरकर 86.90 लाख डॉलर तथा प्रसंस्कृत फलों एवं जूस का निर्यात फिसलकर 55.10 लाख डॉलर पर अटक गया।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार अफगानिस्तान भारतीय चीनी के लिए एक अच्छा बाजार रहा है और वहां थोड़ी मात्रा में ही सही मगर इसका नियमित रूप से निर्यात होता रहा है। लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद उत्पन्न होने के बाद कराची बंदरगाह का मार्ग बंद हो गया और बाघा-अटारी बॉर्डर के सीमा मार्ग को भी बंद कर दिया गया। इसके बाद भारत से ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट के माध्यम से शिपमेंट आरंभ करने पर चर्चा हो रही थी मगर इजरायल के हवाई हमले के कारण इस बंदरगाह को भी बंद करना पड़ गया।
इसके फलस्वरूप वर्तमान समय में भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए यह महत्वपूर्ण विकल्प भी उपलब्ध नहीं हो रहा है। जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती तब तक अफगानिस्तान के साथ-साथ ईरान को भी भारतीय कृषि उत्पादों का निर्यात प्रभावित हो सकता है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चालू मार्केटिंग सीजन में भारत से 31 मई 2025 तक कुल 5,16,782 टन हुआ जिसमें से 72,833 टन का निर्यात अफगानिस्तान को किया गया।
