अफ्रीका में तुअर उत्पादन व व्यापार: पिछले तीन वर्षों की प्रमुख बातें (2023–2025)
15-Jul-2025 12:18 PM
अफ्रीका में तुअर उत्पादन व व्यापार: पिछले तीन वर्षों की प्रमुख बातें (2023–2025)
भारत पर क्या पड़ेगा इसका असर
★ भारत से लगातार बढ़ती डिमांड को देख 2025 में अफ्रीका का तुअर उत्पादन बढ़कर 9 लाख टन पहुंचने की उम्मीद, जो 2023 के मुकाबले 1.5 लाख टन अधिक है।
★ हर साल बढ़ रहा है उत्पादन।
★ 2024 में रिकॉर्ड 9.5 लाख टन तुअर का निर्यात किया गया, लेकिन 2025 में यह घटकर 8 लाख टन रह सकता है।
★ भारत में पिछले साल हुए अच्छे उत्पादन और आयात से पुराना स्टॉक अच्छा, म्यांमार में भी बढ़ा उत्पादन, सप्लाई अच्छी।
★ शुरुआती भंडार 2023 में 0.8 लाख टन से बढ़कर 2024 में 1.3 लाख टन रहा था, पर दो वर्षों से बढ़ते निर्यात से 2025 में घटकर सिर्फ 0.3 लाख टन रह सकता है।
★ 2025 के अंत में बकाया स्टॉक 1.3 लाख टन रहने की उम्मीद।
★ अप्रैल 2025 में अफ्रीकन देशों से 55,420, म्यांमार से 43,625 टन एवं अन्य देशों को मिलाकर कुल 99,546 टन तुअर आयात की गई।
★ OATA के अनुसार जनवरी से जुलाई 2025 तक म्यांमार से 1.82 लाख टन तुअर का निर्यात हो चुका है।
★ जून 2024 में म्यांमार तुअर लेमन के भाव \$1,465 प्रति टन थे जो अब 720 के रेंज में हैं।
★ ठीक इसी तरह भारतीय बाजार भी चल रहे हैं।
★ उपरोक्त आंकड़े देखें तो विदेशों से तुअर आयात आत्मनिर्भरता निरंतर बढ़ती नज़र आ रही है जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी साफ दिख रहा है।
★ अफ्रीका से नई तुअर सितंबर से आनी शुरू होगी, तब तक घरेलू स्टॉक में पड़ी तुअर की डिमांड भी निकल सकती है जिससे कीमतों को मिल सकता है समर्थन।
★ घटे भावों के फलस्वरूप तुअर की बुवाई घट रही है और साथ ही महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमा से सटे जिलों में कम बारिश के कारण नमी कम, जिसका असर फसल पर पड़ने की उम्मीद।
★ लंबे अवधि की बात करें तो यह स्थिति आगामी 20 दिनों में स्पष्ट होगी, जैसे-जैसे बुवाई आंकड़े और मानसून की स्थिति स्पष्ट होगी।
