अगले साल सूरजमुखी तेल का भाव तेज रहने की संभावना
31-Dec-2025 11:07 AM
मास्को। वर्तमान समय में सूरजमुखी तेल का वैश्विक बाजार रूस तथा यूक्रेन के बीच शांति समझौते का इंतजार कर रहा है जिसके लिए बातचीत जारी है। लेकिन उससे पूर्व यूक्रेन के प्रमुख बंदरगाहों पर भयंकर रूसी हमले से बुनियादी पंचायत सुविधाओं को इतना गंभीर नुकसान हो रहा है
कि वहां से सूरजमुखी तेल के निर्यात शिपमेंट में काफी देरी और कठिनाई हो सकती है। यूक्रेन के महत्वपूर्ण ओडेसा बंदरगाह को रूस ने जबरदस्त बमबारी करके क्षत-विक्षत कर दिया है।
व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक दिसम्बर शिपमेंट के लिए सूरजमुखी तेल के निर्यात में पहले ही काफी देर हो चुकी है और अब सबका ध्यान जनवरी-फरवरी- 2026 के परिवहन पर केन्द्रित हो गया है।
परम्परागत रूप से दिसम्बर-जनवरी के शीत कालीन महीनों में यूक्रेन से सूरजमुखी तेल के निर्यात शिपमेंट की गति धीमी रहती है। इससे आयातक देशों में स्टॉक घट जाता है।
ऐसा प्रतीत होता है कि भारत में स्टॉक घटकर काफी नीचे आ जाएगा जिससे घरेलू बाजार में सूरजमुखी तेल की कीमतों में अच्छी तेजी आ सकती है।
कुछ व्यापारियों द्वारा जनवरी-फरवरी शिपमेंट के लिए सीआईएफ भारत आधार पर 1331-1337 डॉलर प्रति टन की दर से सूरजमुखी तेल के आयात का अनुबंध किए जाने की सूचना मिल रही है।
जबकि वर्तमान ऑफर 1345 डॉलर प्रति टन के आसपास बताया जा रहा है। मार्च से अर्जेन्टीना में सूरजमुखी की नई फसल की कटाई-तैयारी आरंभ हो जाएगी और उसका तेल वैश्विक बाजार में पहुंचने लगेगा।
इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी और कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है। लेकिन जुलाई-अगस्त एवं सितम्बर की तिमाही में सूरजमुखी तेल का वैश्विक बाजार भाव एक बार फिर तेज होने की उम्मीद है और यह बढ़कर 1400 डॉलर प्रति टन तक पहुंच सकता है।
2025-26 सीजन के दौरान यूक्रेन में सूरजमुखी का उत्पादन घटकर महज 100 लाख टन के करीब रह गया जबकि रूस में बढ़कर 170 लाख टन के आसपास पहुंच गया।
रूस में जनवरी 2026 में सूरजमुखी तेल पर 37 प्रतिशत का निर्यात शुल्क लागू होने वाला है। आयातकों को आगामी पोजीशनों के सौदों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
