अगस्त में मानसून कमजोर

16-Aug-2025 10:59 AM

जून और जुलाई में देश के विभिन्न भागों में धमाकेदार बारिश की सौगात बांटने के बाद अगस्त में दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ गया और वर्षा की रफ्तार बढ़ने से कुछ इलाकों में चिंताजनक स्थिति पैदा हो गई।

ध्यान देने की बात है कि पिछले साल भी अगस्त में मानसून की बारिश कुछ कम हुई थी जिससे खासकर गन्ना की फसल पर असर पड़ा था। मौसम विभाग के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि 1 से 15 अगस्त 2025 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर केवल 107.20 मि०मी० वर्षा हुई जो दीर्घकालीन औसत (एलपीए) 133.30 मि०मी० से 19.6 प्रतिशत कम रही।

जून-जुलाई में एलपीए के सापेक्ष 106 प्रतिशत वर्षा हुई थी मगर मध्य अगस्त तक आते-आते यह घटकर 100 प्रतिशत पर आ गई। यद्यपि चालू माह के शुरूआती 15 दिनों के दौरान कुछ राज्यों में अच्छी वर्षा हुई लेकिन अन्य प्रांतों में बारिश का अभाव देखा गया।

वर्षा का वितरण काफी हद तक असमान रहा। देश के मध्यर्ती मौसम उपखंडों में सामान्य औसत की तुलना में 59 प्रतिशत कम बारिश हुई जबकि अन्य उपखंडों में वर्षा या तो सामान्य या कुछ अधिक हुई।

वर्तमान मानसून सीजन के दौरान पहली बार देश के पूर्वी एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र में अधिशेष बारिश दर्ज की गई जबकि 1 जून से 31 जुलाई के दौरान प्रत्येक पखवाड़े में वहां 100 प्रतिशत से कम वर्षा होती रही।

बिहार के एक दर्जन से अधिक जिले भयंकर बाढ़ की चपेट में हैं और वहां खरीफ फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। अगस्त के प्रथम पखवाड़े के दौरान चार राज्यों-बिहार, आसाम,

अरुणाचल प्रदेश एवं मेघालय के तीन मौसम उपखंडों में बारिश की स्थिति 1 जून से 15 अगस्त के बीच कमजोर रही जबकि देश के कुछ क्षेत्रफल में इसकी भागीदारी 9 प्रतिशत रहती है। 

चालू माह के प्रथम पखवाड़े के दौरान सामान्य औसत के मुकाबले पूर्वी एवं पूर्वोत्तर राज्यों में 8.1 प्रतिशत तथा दक्षिणी प्रायद्वीप में 25.6 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई जबकि मध्यवर्ती संभाग में आने वाले राज्यों-उड़ीसा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात में सामान्य औसत से 59.2 प्रतिशत और देश के पश्चिमोत्तर भाग में 2 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।

मालूम हो कि उड़ीसा एवं छत्तीसगढ़ में धान तथा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात में दलहन-तिलहन तथा कपास की खेती बड़े पैमाने पर होती है। 1 जून से 15 अगस्त के बीच राष्ट्रीय स्तर पर 581.5 मि०मी० वर्षा हुई जो 579.10 मि०मी० के सामान्य औसत से कुछ ही अधिक है।

अब सबका ध्यान अगस्त के दूसरे पखवाड़े (16 से 31 अगस्त) के दौरान होने वाली वर्षा पर केन्द्रित है क्योंकि यह अवधि खरीफ फसलों की प्रगति के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण मानी जा रही है।