अल नीनो के प्रकोप से मानसून की वर्षा प्रभावित होने की आशंका

05-Jan-2026 05:35 PM

नई दिल्ली। वर्ष 2026 का समय भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए मिश्रित परिणाम वाला साबित हो सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जनवरी-फरवरी में ला नीना मौसम चक्र की सक्रियता से बारिश की स्थिति सामान्य रह सकती है लेकिन मार्च में वर्षा का अभाव हो सकता है।

इसके बाद अप्रैल-जून की तिमाही में हिन्द महासागर का डायपोल न्यूट्रल (उदासीन) बना रहेगा जिससे मानसून-पूर्व की बारिश पर ज्यादा प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा लेकिन उसी समय ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में पानी की सतह का तापमान बढना शुरू हो सकता है। इससे अल नीनो मौसम चक्र के आगमन की संभावना बन सकती है। 

उल्लेखनीय है कि अल नीनो मौसम चक्र को भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए अनुकूल या हितैषी नहीं माना जाता है। यद्यपि यह आवश्यक नहीं है

कि अल नीनो वाले वर्ष में मानसून की बारिश नदारद रहे लेकिन अब तक के रिकॉर्ड को देखने से पता चलता है कि अल नीनो के प्रकोप से मानसून की बारिश सामान्य औसत से कम या बहुत कम होती है। यह आंकड़ा सभी वर्षों का तो नहीं मगर अधिकांश वर्षों का अवश्य है। इस पर गहरी नजर रखने की जरूरत है। 

चिंता की बात यह है कि मौसम विशेषज्ञों ने जुलाई- अगस्त-सितम्बर में अल नीनो की सक्रियता पीक पर रहने का अनुमान लगाया है जबकि इसी अवधि में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा एवं खरीफ फसलों की बिजाई भी शीर्ष स्तर पर होती हैं।

भारत में सबसे ज्यादा बारिश जुलाई-अगस्त में होती है। यदि उस समय अल नीनो की वजह से वर्षा प्रभावित होती है तो खरीफ फसलों की बिजाई और प्रगति पर असर पड़ सकता है। दरअसल जुलाई-अगस्त में भयंकर गर्मी पड़ती है और तापमान काफी ऊंचा रहता है।

इससे खेतों की मिटटी से नमी सूखने की गति बढ़ जाती है और खेतों में दरारे पड़ने लगती है। उस समय मानसून की अच्छी वर्षा ही किसानों का मजबूत सहारा बनती है। वैसे फिलहाल अल नीनो के आने की आशंका व्यक्त की गई है। अगले छह महीनों में स्थिति कैसी रहती है यह देखना आवश्यक होगा। अभी कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।