अमरीका के व्यापारिक दबाव से एथनॉल उद्योग के लिए खतरा

16-Jun-2025 11:28 AM

अमरीका के व्यापारिक दबाव से एथनॉल उद्योग के लिए खतरा 

नई दिल्ली। भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए जो बातचीत हो रही है उसमें अमरीका भारत में एथनॉल के आयात पर लगे नियंत्रणों-पाबंदियों में छूट देने के लिए दबाव डाल रहा है और भारत सरकार इस पर गम्भीरतापूर्वक विचार भी कर रही है लेकिन इससे घरेलू एथनॉल निर्माण उद्योग के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न होने की आशंका है। 

जानकार सूत्रों के अनुसार अमरीका पहले से ही भारत में ईंधन वाले एथनॉल के आयात पर लगे नियंत्रणों को हटाने की जरूरत पर जोर दे रहा है जिसका इस्तेमाल मुख्यतः पेट्रोल में मिश्रण के लिए किया जाता है। वर्तमान स्थिति यह है कि भारत में ईंधन वाले एथनॉल के आयात पर प्रतिबंध लगा हुआ है जबकि गैर ईंधन वाले एथनॉल के आयात पर ऊंचे स्तर पर सीमा शुल्क लागू है। इसका उद्देश्य स्वदेशी एथनॉल निर्माण उद्योग के हितों की रक्षा करना है। 

उद्योग समीक्षकों के अनुसार यदि भारत में अमरीकी एथनॉल के निर्बाध आयात की अनुमति प्रदान की गई तो कई स्तर पर इसका असर सामने आ सकता है। भारत में मुख्यतः: गन्ना तथा अनाज (मक्का एवं चावल) से एथनॉल का निर्माण किया जाता है। एथनॉल निर्माताओं ने डिस्टीलरीज की स्थापना एवं उसके विकास-विस्तार पर भारी-भरकम पूंजी का निवेश कर रखा है। अगर अमरीका से सस्ते एथनॉल का विशाल आयात शुरू हो गया तो न केवल भारतीय डिस्टीलर्स को भारी आर्थिक नुकसान होगा बल्कि गन्ना उत्पादकों को बकाया राशि हासिल करने के लिए कठिन संघर्ष भी करना पड़ेगा। इसके अलावा मक्का की कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है जिससे इसकी खेती में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घट सकता है। इसके साथ निवेशकों के आत्मविश्वास को आघात लगेगा और बैंकों / वित्तीय संस्थानों को एथनॉल निर्माताओं को दिए ऋण की वसूली में कठिनाई होगी। इतना ही नहीं बल्कि 'मेक इन इंडिया' विजन के तहत स्वदेशी शर्तों से एथनॉल के उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने का लक्ष्य भी अधूरा रह जाएगा। हाल के वर्षों में एथनॉल के उत्पादन में अच्छी वृद्धि हुई है।