अमरीकी नीति से भारतीय निर्यात बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका
09-Jan-2026 05:10 PM
नई दिल्ली। अमरीका ने रूस से क्रूड खनिज तेल खीरदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाने का जो विधेयक तैयार किया है उसके संसद से पारित होने के बाद भारत, चीन और ब्राजील सहित कई अन्य देशों की कठिनाई काफी बढ़ जाएगी।
एक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अनुसंधान संस्था के अनुसार अमरीका में यह 500 प्रतिशत का ऊंचा टैरिफ वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं (सर्विसेज) पर भी लागू हो सकता है। इससे वहां भारत से होने वाला 120 अरब डॉलर का औसत वार्षिक निर्यात पूरी तरह ठप्प पड़ सकता है।
संस्था के मुताबिक सेवाओं पर टैरिफ लगाने का कोई कानूनी प्रावधान (मैकेनिज्म) नहीं है इसलिए टैरिफ में ही आने वाली कोई भी बढ़ोत्तरी परोक्ष रूप से लागू की जा सकती है।
इसके तहत भारतीय सेवाओं के निर्यात के लिए भुगतान हेतु अमरीकी कंपनियों पर टैक्स लगाने का प्रयास किया जा सकता है।
इस विधेयक में जो अन्य प्रावधानों का प्रस्ताव किया गया है उसमें रूस के साथ कारोबार करने या किसी तरह का सम्बन्ध-सम्पर्क रखने वाले व्यक्तियों तथा प्रतिष्ठानों पर अनेक तरह का नियंत्रण या प्रतिबंध लगाना भी शामिल है।
वैसे भारत पर इसका प्रत्यक्ष रूप से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि भारतीय उत्पादों पर अमरीका में पहले से सही 50 प्रतिशत का टैरिफ इसी आधार पर लागू हो चुका है।
एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारत सहित अन्य व्यापारिक साझीदार देशों के उत्पादों पर जो अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा उसे अमरीकी अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
अमरीकी सुप्रीम कोर्ट में उन मामलों पर आजकल में कोई निर्णय आने की संभावना है जो इन टैरिफ की वैधानिकता पर संदेह उत्पन्न करते हैं। इसका कारण यह है कि ये टैरिफ अमरीकी संसद की सहमति के बगैर लगाए गए थे।
