अमरीकी टैरिफ के मद्दे नजर स्वदेशी कपास क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह

18-Aug-2025 04:07 PM

चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने केन्द्र से आग्रह किया है कि अमरीका में बनाए जा रहे उच्च स्तरीय टैरिफ के दुष्प्रभाव से स्वदेशी कॉटन टेक्टाइल उद्योग को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल आवश्यक एहतियाती  कदम उठाया जाए।

अमरीका भारतीय वस्त्र उत्पादों का बहुत बड़ा बाजार है और वहां तमिलनाडु से भी बड़े पैमाने पर इसका निर्यात होता है। 7 अगस्त से अमरीका में भारतीय वस्त्र उत्पादों पर 25 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू हो चुका है जबकि 27 अगस्त से इसे दोगुना बढ़ाकर 50 प्रतिशत नियत करने की घोषणा की गई है।

दूसरी और चीन, पाकिस्तान, बांग्ला देश एवं वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के वस्त्र उत्पादों पर बहुत कम टैक्स लगाया गया है। ऐसी हालत में अमरीका में भारतीय कपड़ों का निर्यात ठप्प पड़ जाने की आशंका है।

भारतीय कॉटन टेक्सटाइल उद्योग अपने उत्पादों के निर्यात के लिए अमरीकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर है और इसलिए उसे हाथ से नहीं निकलने देना चाहिए। 

अमरीकी टैरिफ का अनुपातिक असर अन्य राज्यों की तुलना में तमिलनाडु के कॉटन उद्योग पर ज्यादा पड़ेगा । उल्लेखनीय है कि टेक्सटाइल सेक्टर तमिलनाडु में विदेशी मुद्रा की सर्वाधिक कमाई करने वाला उद्योग है इसलिए राज्य सरकार की चिंता स्वाभाविक रूप से काफी बढ़ गई है।

तमिलनाडु के कॉटन उद्योग में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप में लगभग 75 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है और देश में वस्त्र उत्पादों के निर्यात में सर्वाधिक योगदान देने वाले राज्यों में तमिलनाडु का महत्वपूर्ण स्थान है। 

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने आगाह किया है कि यदि अमरीका में 50 प्रतिशत का टैरिफ लागू हो गया और भारत सरकार ने तत्काल कोई आवश्यक कदम नहीं उठाया तो राज्य में करीब 30 लाख लोगों का रोजगार खतरे में पड़ जाएगा।

प्रधानमंत्री को भेजे एक पत्र में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने कॉटन टेक्सटाइल क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।