अमरीकी टैरिफ पर भारत की नजर

23-Aug-2025 11:26 AM

अमरीका में ट्रम्प प्रशासन 7 अगस्त से भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू कर चुका है और 27 अगस्त से इसे दोगुना बढ़ाकर 50 प्रतिशत नियत करने की घोषणा भी कर चुका है।

इससे भारतीय आयातकों की दुविधा बढ़ गई है क्योंकि उसे आशंका है कि अमरीकी टैरिफ की प्रतिक्रिया में भारत सरकार भी बदले की कार्रवाई के तहत अमरीकी उत्पादों पर आयात शुल्क में बढ़ोत्तरी की घोषणा कर सकती है।

जिससे भारत में अमरीकी कृषि उत्पादों का आयात महंगा हो जाएगा और आयातकों को नुकसान की आशंका बढ़ जाएगी। भारतीय आयातकों द्वारा अमरीका से खासकर मसूर तथा अन्य दलहनों के आयात में काफी सावधानी बरती जा रही है।

यद्यपि उन्होंने अमरीकी उत्पादों के आयात के लिए नया अनुबंध करना बंद  नहीं किया है लेकिन माल की सभी लोडिंग को अगस्त के अंत तक के लिए स्थगित कर दिया है।

उम्मीद की जा रही है कि अमरीकी टैरिफ के सापेक्ष भारत सरकार यदि शुल्क वृद्धि का कोई निर्णय लेती है तो इसकी घोषणा 31 अगस्त 2025 से पहले की जा सकती है।

ध्यान देने की बात है कि अमरीका में मसूर-मटर एवं काबुली चना तथा बीन्स आदि फसलों की कटाई-तैयारी आरंभ हो चुका है और इसका दाम भी अपेक्षाकृत नीचे चल रहा है।

इससे इसकी खरीद में भारतीय आयातकों की अच्छी दिलचस्पी बनी हुई है। अमरीका से हरी मसूर की अच्छी मात्रा का निर्यात होता है जिससे तुवर का एक बेहतर विकल्प माना जाता है। इसके अलावा वह पीली मटर और चना का भी भारत को निर्यात करता है। 

भारत में तमिलनाडु के आयातक अमरीका से भारी मात्रा में हरी मसूर का आयात करते हैं क्योंकि वहां राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन दुकानों के जरिए लाभार्थियों के बीच इसका वितरण किया जाता है।

पिछले साल भारत में अमरीका से 44 हजार टन से अधिक हरी मसूर का आयात हुआ जिसकी थोड़ी मात्रा की बिक्री खुले बाजार में भी की गई। अभी भारतीय आयातक कुछ सशंकित है और इसलिए मसूर सहित अन्य दलहनों का आयात कुछ समय के लिए रोकना चाहते हैं।

अमरीकी बंदरगाहों पर जहाजों में इसकी लेडिंग रोक दी गई है। अन्य कृषि उत्पादों के मामले में भी यही स्थिति देखी जा रही है। सबका ध्यान अमरीकी टैरिफ पर केन्द्रित है क्योंकि 27 अगस्त अब ज्यादा दूर नहीं है।