अमरीकी टैरिफ से भारत के प्रति अनेक विकसित देशों के नजरिए में बदलाव
08-Apr-2025 05:29 PM
नई दिल्ली । अमरीकी राष्ट्रपति ने अपनी नई टैरिफ (सीमा शुल्क) नीति से पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। अब जो देश निर्यात के लिए अमरीका पर निर्भर थे उसे अब वैकल्पिक बाजारों की तलाश करनी पड़ रही है।
अनेक विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार संधि के लिए भारत की बातचीत हो रही थी और वार्ता के क्रम में वे देश अपनी जिद या हठधर्मिता पर अड़े हुए थे लेकिन अमरीकी टैरिफ नीति से उसकी हेकड़ी निकल रही है और वे व्यापार वार्ता में भारत को कुछ अतिरिक्त रियायत देने का संकेत दे रहे हैं।
उसके नजरिए में आए इस बदलाव का प्रमुख कारण यह है कि वे देश भारत के साथ जल्दी से जल्दी मुक्त व्यापार समझौता करना चाहते हैं ताकि विशाल भारतीय बाजार में अपने उत्पादों का निर्यात बढ़ा सके।
भारत इस वास्तविकता से अवगत है इसलिए विभिन्न व्यापार वार्ताओं में सम्बद्ध देशों या राष्ट्र समूहों से अधिक से अधिक रियायत हासिल करना चाहेगा।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इन व्यापारिक साझीदारों द्वारा दिए जा रहे सकारात्मक से भारत को अपने वाणिज्यिक कारोबारी संवर्ग का दायरा बढ़ाने में सहायता मिलेगी और अमरीकी टैरिफ से भारतीय उत्पादों वाले प्रतिकूल प्रभावों को न्यूनतम स्तर तक सीमित रखना संभव हो सकेगा।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान समय में भारत से सामानों के कुल निर्यात में अमरीकी आयात की भागीदारी करीब 18 प्रतिशत है। वहां नए टैरिफ से भविष्य में निर्यात प्रभावित हो सकता है इसलिए भारत के लिए यह आवश्यक एवं महत्वपूर्ण होगा
कि वह उससे पूर्व ही अपनी आपूर्ति शृंखला को पुनर्गठित करे और वैकल्पिक बाजारों तक अधिक से अधिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अपनी हैसियत का उपयोग करने से न चूके।
इस क्रम में भारत को अपने अन्य प्रमुख व्यापारिक साझीदार देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का प्रयास करना होगा। इसमें यूरोपीय संघ एवं ब्रिटेन अब भारत के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी मुद्रा का और अवमूल्यन करने पर ध्यान देना चाहिए ताकि व्यापारिक साझीदार देश भारतीय उत्पादों की खरीद में ज्यादा से ज्यादा दिलचस्पी दिखा सके।
लेकिन इसका दूसरा पक्ष यह है कि रुपए की विनिमय दर में ज्यादा गिरावट आने पर विदेशों से आयात महंगा हो जाएगा और घरेलू प्रभाग में महंगाई बढ़ने का खतरा रहेगा।
