अप्रैल-नवम्बर में 71.70 लाख टन यूरिया का विशाल आयात

08-Jan-2026 08:38 PM

नई दिल्ली। घरेलू उत्पादन में गिरावट आने से चालू वित्त वर्ष के आरम्भिक आठ महीनों में यानी अप्रैल-नवम्बर 2025 के दौरान देश में यूरिया का कुल आयात उछलकर 71.70 लाख टन पर पहुंच गया जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के आयात की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा रहा।

इससे घरेलू प्रभाग में किसानों की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विदेशों से यूरिया के आयात पर निर्भरता बढ़ाने का स्पष्ट संकेत मिलता है।

फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल-नवम्बर 2024 के आठ महीनों के दौरान देश में केवल 32.60 लाख टन यूरिया का आयात किया गया था। दूसरी ओर इसी अवधि में यूरिया का घरेलू उत्पादन 3.7 प्रतिशत घटकर 197.50 लाख टन रह गया। 

एसोसिएशन के आंकड़ों से पता चलता है कि कुल मिलाकर यूरिया की बिक्री इसी अवधि में 2.3 प्रतिशत बढ़कर 254 लाख टन पर पहुंच गई। अप्रैल से नवम्बर के बीच खरीफ के साथ रबी फसलों की बिजाई भी होती है और इसलिए यह समय यूरिया की खपत के लिए पीक सीजन माना जाता है।

एसोसिएशन के चेयरमैन का कहना है कि यद्यपि सुनियोजित प्लानिंग के माध्यम से यूरिया की मांग एवं जरूरत में होने वाली वृद्धि को पूरा कर लिया गया लेकिन आयात पर निर्भरता जरूरत से ज्यादा बढ़ गई।

यूरिया के साथ-साथ डीएपी खाद का आयात भी बढ़ गया। इसे देखते हुए रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन को और भी मजबूत बनाए जाने की आवश्यकता है। 

नवम्बर 2024 में 7.80 लाख टन यूरिया मंगाया गया था जबकि नवम्बर 2025 में इसका आयात 68 प्रतिशत उछलकर 13.10 लाख टन पर पहुंच गया।

इस अवधि में यूरिया की घरेलू बिक्री भी 4.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 37.50 लाख टन पर पहुंच गई। नवम्बर में रबी फसलों और खासकर गेहूं की खेती के लिए यूरिया की मांग काफी बढ़ गई।