अत्यन्त ऊंचे तापमान से रबी फसलों पर असर पड़ने की आशंका
24-Apr-2025 07:49 PM
नई दिल्ली। देश के प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में तापमान काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है जो कृषि क्षेत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। रबी सीजन में उत्पादित होने वाली फसलों- गेहूं, जौ, चना, मसूर, मटर एवं सरसों आदि की जोरदार कटाई-तैयारी हो रही है।
जो फसलें कट चुकी हैं या कट रही हैं उस पर तो ऊंचे तापमान का असर नहीं पड़ेगा लेकिन पिछैती बिजाई वाली फसलें इस भीषण गर्मीं से प्रभावित हो सकती हैं।
वर्षा का अभाव है और ऊंचे तापमान के कारण खेतों की मिटटी सूखती जा रही है जिससे फसलों के विकास में ठहराव आ सकता है। और इसकी उपज दर घट सकती है।
देश के पश्चिमोत्तर भाग में गेहूं, जौ, सरसों एवं चना की पैदावार पर गहरी नजर रखी जा रही है। भीषण गर्मी से छोटे दाने भी जल्दी पकने लगते हैं और पुष्ट या पूर्ण विकसित होने का समय नहीं मिल पाता है।इस वक्त मिटटी में नमी का होना आवश्यक और लाभदायक माना जाता है।
सरकार को चालू रबी सीजन के दौरान विभिन्न फसलों का उत्पादन बेहतर होने का भरोसा है। फरवरी तक मौसम काफी हद तक रबी फसलों के लिए अनुकूल रहा था मगर मार्च और अप्रैल में गर्मी का प्रकोप बढ़ गया। गुजरात एवं राजस्थान जैसे राज्यों में हीटवेव का प्रकोप है।
इधर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली एनसीआर में भी पारा काफी ऊंचा है। उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश क्रमश: मटर एवं मसूर के सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त हैं मगर वहां भी गर्मी का प्रचंड रूप सामने आ रहा है।
पूर्वी भारत में बंगाल, बिहार, झारखंड एवं आसाम में सरसों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। बिहार में गेहूं, मक्का एवं मसूर का भी अच्छा उत्पादन होता है। रबी कालीन मक्का के उत्पादन में बिहार देश का सबसे अग्रणी राज्य है। वहां भी मौसम काफी गर्म और शुष्क हो गया है।
दक्षिण भारत में स्थिति काफी हद तक सामान्य है क्योंकि वहां बीच-बीच में मानसून-पूर्व की बारिश हो रही है। भीषण गर्मी एवं बारिश की कमी से नदी-नाले, तालाब, सरोवर एवं बांध-जलाशय सूखने लगे हैं।
पंजाब-हरियाणा एवं राजस्थान में कपास की अगैती बिजाई हो रही है और वहां बरसात की जरूरत है क्योंकि-जलाशयों में पानी का स्टॉक काफी कम रह गया है।
