अदालत ने काजू आयातकों की मांग पर एक जहाज को रोकने का दिया आदेश

13-Jun-2025 12:32 PM

कोच्चि। केरल उच्च न्यायालय ने विजिनजाम बंदरगाह के अधिकारियों को एमएससी मनाफा एफ नामक  जहाज को तब रोके रखने का निर्देश दिया है जब तक उसका मालिक 6 करोड़ रुपए की वह राशि जमा नहीं करवा देता जिसका दावा कच्चे काजू के उन विभिन्न आयातकों द्वारा किया गया है जो काजू निर्यात संवर्धन परिसर के सदस्य हैं। दरअसल एमएससी एल्सा 3 नामक जहाज समुद्र में डूब गया था जिस पर विदेशों से आयातित कच्चे काजू की खेप लदी हुई थी। आयातकों ने इसके एवज में 6 करोड़ रुपए के मुआवजे का दावा किया। अब अदालत ने जिस एमएससी मनाफा एफ नामक जहाज को रोके रखने का निर्देश दिया है वह उसी शिपिंग फर्म का है जिसका एक जहाज समुद्र में डूब गया था।

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा है कि यदि शिपिंग कम्पनी 6 करोड़ रुपए का डिमांड ड्राफ्ट जमा कर देती है तो जहाज को केरल के समुद्री आंचलिक क्षेत्र से बाहर जाने की अनुमति दी जा सकती है। उल्लेखनीय है कि विभिन्न आयातकों ने केरल उच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल करते हुए दावा किया था कि बिल ऑफ लेडिंग नियमों- शर्तों के अनुरूप कच्चे काजू से लदा जहाज डिस्चार्ज पोर्ट तक सुरक्षित  नहीं पहुंच पाया और इससे उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ। 

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि यद्यपि कैरियर (शिपिंग कम्पनी) द्वारा कार्गो के आगमन की सूचना जारी की गई लेकिन उसने आयातकों को आयातित काजू का खेप की डिलीवरी नहीं दी और न ही कम्पनी द्वारा आयातकों के व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया। भारतीय काजू निर्यात संवर्धन परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि आयातक इसके लिए मुआवजों की मांग कर रहे हैं। डूबे जहाज पर जो माल लदा हुआ था वह नष्ट हो गया। अनुबंधीय दायित्वों के अनुसार कच्चे काजू की खेप को 26 मई को थुथूकुडी में पहुंचना था लेकिन इस जहाज को कोचीन बंदरगाह की तरफ मोड़ दिया गया। इससे स्थिति बदल गई। अफ्रीकी देशों से कच्चे काजू का आयात हो रहा था। यह माल आयातकों तक नहीं पहुंच सका।