अधिकांश प्रमुख उत्पादक राज्यों में बढ़ रहा है धान का क्षेत्रफल

13-Aug-2025 11:00 AM

नई दिल्ली। खरीफ सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न-धान की खेती में भारतीय किसानों का जोरदार उत्साह एवं आकर्षण बरकरार है जिससे इसके उत्पादन क्षेत्र में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी हो रही है।

अगर यह सिलसिला बरकरार रहा तो 2025-26 के सीजन में धान का क्षेत्रफल तेजी से उछलकर सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच सकता है जिससे इसकी पैदावार में भी अच्छी बढ़ोत्तरी होगी।

दिलचस्प तथ्य यह है कि धान एक मात्र ऐसा कृषि उत्पाद है जिसकी खेती देश के सभी राज्यों में होती है। इसमें केरल से लेकर कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश से लेकर गुजरात तक का इलाका शामिल है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर धान का कुल उत्पादन क्षेत्र 8 अगस्त 2025 तक उछलकर 364.80 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो वर्ष 2024 की समान अवधि के रकबा 325.36 लाख हेक्टेयर से 12.1 प्रतिशत या 39.44 लाख हेक्टेयर अधिक है।

इस बार धान का पंचवर्षीय (सामान्य) औसत क्षेत्रफल 403.09 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि फिलहाल वास्तविक रकबा 365 लाख हेक्टेयर के करीब पहुंचा है। देश के पूर्वी तथा दक्षिणी प्रांतों में धान की रोपाई देर तक चलती रहती है।

छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा, बंगाल, बिहार तथा तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में कम से कम अगस्त के अंत तक धान की रोपाई जारी रहने की संभावना है जिससे इसका कुल उत्पादन क्षेत्र सामान्य औसत क्षेत्रफल से आगे निकल कर एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने के आसार हैं।

उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात के साथ-साथ कर्नाटक में भी धान की खेती का अभियान या तो समाप्त हो चुका है या बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच गया है। 

विभिन्न राज्यों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की अच्छी बारिश होने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) आकर्षक स्तर पर  रहने से इस बार धान की खेती में किसानों की सक्रियता काफी बढ़ गई है।

धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 69 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है जिससे सामान्य श्रेणी के धान का एमएसपी 2300 रुपए से बढ़कर 2369 रुपए प्रति क्विंटल तथा 'ए' ग्रेड धान का एमएसपी 2320 रुपए से बढ़कर 2389 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है।

धान-चावल का उत्पादन बढ़ने पर सरकार की कठिनाई बढ़ जाएगी क्योंकि उसके पास पहले से ही चावल का अत्यन्त विशाल स्टॉक मौजूद है।