बंगाल में धान की खेती में लघु एवं सीमांत किसानों का विशेष योगदान

10-Jul-2025 08:32 PM

खड़गपुर। भारत के सबसे प्रमुख चावल उत्पादक राज्य- पश्चिम बंगाल में धान की खेती बड़े पैमाने पर और लगभग सभी जिंसों में होती है। वहां खरीफ के साथ-साथ रबी सीजन में भी धान का उत्पादन होता है लेकिन अधिकांश उत्पादन खरीफ सीजन में होता है।

उदाहरणस्वरूप 2024-25 के सम्पूर्ण सीजन के दौरान बंगाल में धान का कुल उत्पादन बढ़कर 256 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जिसमें रबी सीजन की फसल का योगदान 76 लाख टन रहा जबकि 180 लाख टन का उत्पादन खरीफ सीजन में हुआ। 

पश्चिम बंगाल के ग्रामीण विकास मंत्री का कहना है कि धान उत्पादन की दृष्टि से छोटे और सीमांत किसान राज्य की ताकत बने हुए हैं और वे इसकी खेती एवं पैदावार बढ़ाने का सर्वोत्तम प्रयास करते हैं। 

राज्य सरकार भी हमेशा उन्हें सही समय पर प्रोत्साहन एवं मार्ग दर्शन देती है और तमाम कृषि साधन   उपलब्ध करवाती है। कृषि क्षेत्र में सही समय पर काम पूरा होना बहुत आवश्यक तथा महत्वपूर्ण होता है। किसानों को खाद, बीज, कीटनाशक एवं सिंचाई की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार पहले से ही तैयार रहती है। 

ध्यान देने की बात है कि इस बार कई अन्य राज्यों की भांति पश्चिम बंगाल में भी मानसून की अच्छी बारिश हो रही है जिससे किसानों को धान की रोपाई करने का बेहतरीन अवसर मिल रहा है।

इस वर्ष राज्य में 42 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है और सरकार को यह लक्ष्य आसानी से हासिल हो जाने का भरोसा है क्योंकि किसान खरीफ सीजन के इस सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न की खेती में जबरदस्त उत्साह दिखा रहे हैं। 

राष्ट्रीय स्तर पर इस वर्ष 7 जुलाई तक सामान्य औसत से 15 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई जिससे धान सहित अन्य खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से आगे चल रहा है। जुलाई-अगस्त में भरपूर वर्षा होने की उम्मीद है जिससे फसलों की खेती की रफ्तार तेज रह सकती है।