बांग्ला देश में अशांति से भारतीय वस्त्र उत्पादों का निर्यात बढ़ने के आसार

09-Dec-2024 11:09 AM

सूरत । बांग्ला देश में जारी राजनैतिक अनिश्चितता, हंगामा तथा उपद्रव के कारण न केवल उद्योग-व्यापार क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है बल्कि वस्त्र उत्पादों का निर्यात भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है जबकि वस्त्र उद्योग को बांग्ला देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़  की हड्डी माना जाता है।

वहां से वस्त्र उत्पादों और खासकर सूती कपड़ों, कॉटनयार्न एवं फेब्रिक्स के निर्यात की अनिश्चित्त स्थिति को देखते हुए अनेक वैश्विक ब्रांडों एवं स्थानीय उद्यमियों ने अब भारत से इसका आयात बढ़ाना शुरू कर दिया है।

नामी गिरामी ब्रांडों ने आपूर्ति की निरंतरता को सुनिश्चित करने के लिए अब बांग्ला देश के बजाए भारतीय निर्माताओं से अपनी मांग एवं जरूरत को पूरा करना आरंभ कर दिया है।

बांग्ला देश का सूती वस्त्र उद्योग मुख्यत: भारत से आयातित कपास पर निर्भर रहता है मगर वहां कुछ कटर पंथी संगठन भारतीय उत्पादों के आयात के खिलाफ हैं और इस पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। सरकार बहुत कमजोर और लाचार है। 

दूसरी ओर भारत में अन्य उद्योगों की भांति कॉटन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सूती वस्त्र उद्योग) का निरन्तर विकास-विस्तार हो रहा है। देश में मजबूत सरकार के साथ शांति बनी हुई है और निर्यात कारोबार में कहीं कोई बाधा नहीं है।

सूरत के एक उद्यमी एवं निर्यातक का कहना है कि दुनिया के कई अग्रणी ब्रांडों (कंपनियों) से उत्पादन एवं आपूर्ति के लिए पूछ परख पहले ही आरंभ हो चुकी है और अब नए-नए आर्डर भी मिलने लगे हैं।

वर्तमान समय में सूरत का वस्त्र उद्योग 12 प्रतिशत वार्षिक विकास की दर से आगे बढ़ रहा है और यदि ग्लोबल ब्रांडों की मांग में तेजी आई तो इसकी विकास दर बढ़कर 20-25 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इन नए आर्डर से तमिलनाडु, पंजाब तथा नोएडा के वस्त्र निर्माताओं को भारी फायदा होने की उम्मीद है। 

हालांकि चीन के बाद बांग्ला देश दुनिया में रेडीमेड गारमेंट्स का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है मगर फेब्रिक्स के लिए सूरत से होने वाली आपूर्ति पर काफी हद तक वह निर्भर रहता है। ज्ञात हो कि सूरत (गुजरात) को भारत का 'टेक्सटाइल सिटी, कहा जाता है।