बांग्ला देश में सरकार के साथ-साथ प्राइवेट फर्मों द्वारा भी भारत से चावल का आयात शुरू
19-Nov-2024 06:36 PM
चटगांव । मूसलाधार वर्षा, भयंकर बाढ़ एवं समुद्री चक्रवाती तूफान के प्रकोप से बांग्ला देश में धान की फसल को हुए भारी नुकसान के कारण चावल के उत्पादन में कम से कम 10-11 लाख टन की गिरावट आने की आशंका है। इसके मनोवैज्ञानिक असर से उसके घरेलू प्रभाग में चावल का भाव काफी ऊंचा तेज तेज हो गया।
इसे देखते हुए जहां एक ओर सरकार ने अपने स्तर से 5 लाख टन चावल का आयात करने का निर्णय लिया वहीं प्राइवेट फर्मों को भी विदेशों से इसे मंगाने की अनुमति प्रदान करते हुए चावल पर लगे आयात शुल्क को वापस ले लिया है।
बांग्ला देश का खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग नियमित रूप से चावल के आयात के लिए अंतर्राष्ट्रीय टेंडर जारी कर रहा है। अभी भी 50 हजार टन गैर बासमती सेला चावल के आयात का टेंडर खुला हुआ है जबकि इससे पूर्व में जारी टेंडर में भारत की एक कम्पनी ने सबसे आकर्षक ऑफर मूल्य दिया था।
चूंकि बांग्ला देश भारत का निकटतम पूर्वी पड़ोसी देश है इसलिए वहां मुख्यत: भारतीय चावल के आयात को प्राथमिकता दी जा रही है।
उधर भारत सरकार द्वारा सेला चावल को निर्यात शुल्क से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है और सफेद चावल का निर्यात भी खोल दिया गया है जिससे बांग्ला देश को इसे मंगाने में कोई कठिनाई नहीं हो रही है।
भारत से बांग्ला देश को एक मार्ग (ट्रक), रेलवे (ट्रेन) तथा समुद्री मार्ग (जहाज)- तीनों रास्ते से चावल भेजा जा सकता है। सरकारी स्तर पर मुख्यत: समुद्री मार्ग से चावल मंगाने पर जोर दिया जा रहा है और इसके लिए चटगांव तथा मोंगला बन्दरगाह को नामित किया गया है जबकि प्राइवेट फर्में स्थल मार्ग से ट्रकों के जरिए चावल मंगाने का प्रयास कर रही हैं।
बीनापोल लैंड पोर्ट पर भारतीय चावल का पहुंचना शुरू हो गया है। आगामी दिनों में इसकी रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। भारत में निर्यात योग्य चावल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और इसके निर्यात पर को पाबन्दी भी नहीं है।
