भारी आयात के कारण कालीमिर्च के उत्पादकों की बढ़ रही कठिनाई

03-Feb-2025 06:22 PM

कोच्चि । एक जमाना था जब भारत दुनिया में कालीमिर्च का सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यातक देश बना हुआ था लेकिन हाल के दशकों में इसके निर्यात में भारी गिरावट आई है और शिपमेंट अस्थिर बना हुआ है।

विदेशों से कालीमिर्च का आयात बहुत बढ़ गया है और इस सस्ते माल का प्रवाह ज्यादा होने से स्वदेशी उत्पादकों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत अब कालीमिर्च के निर्यातक से आयातक देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। घरेलू प्रभाग में इसकी उपज दर तथा वैश्विक निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धी क्षमता घटती जा रही है।  

एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत वैश्विक निर्यात बाजार में अपने खोए हुए गौरवशाली स्थान को दोबारा हासिल कर सकता है और स्वदेशी उत्पादकों को बेहतर सहयोग-समर्थन भी दे सकता है लेकिन इसके लिए कुछ आवश्यक कदम उठाने होंगे।

भारतीय कालीमिर्च की क्वालिटी सर्वोत्तम मानी जाती है। यदि इसके प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्माण तथा निर्यात करने पर जोर दिया जाए तो सभी पक्ष लाभान्वित हो सकते हैं। यदि अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार में भारत को अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ानी है तो नई रणनीति पर काम करना होगा। 

दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार संधि (साफ्टा) के अंतर्गत श्रीलंका के रास्ते वियतनाम से शुल्क मुक्त कालीमिर्च का भारी आयात हो रहा है। इससे घरेलू प्रभाग में स्वदेशी उत्पाद के मुकाबले आयातित कालीमिर्च सस्ती हो जाती है।

जो निर्यातक साबुत कालीमिर्च अथवा उसके मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात कारोबार से जुड़े हैं वे विदेशों से आयात पर निर्भरता बढ़ा रहे हैं क्योंकि वह कालीमिर्च सस्ती होती  है।

कालीमिर्च का वैश्विक उत्पादन बढ़ रहा है जिससे भारतीय बाजारों में कीमत घट रही है और छोटे तथा सीमांत  उत्पादकों की कठिनाई बढ़ रही है।

भारत में कर्नाटक, केरल तथा तमिलनाडु कालीमिर्च के तीन शीर्ष उत्पादक राज्य हैं। कर्नाटक में सबसे ज्यादा उत्पादन होता है जबकि केरल में इडुक्की इसका सबसे प्रमुख उत्पादक जिला है।