भारत आटा के साथ सोयामील के मिश्रण पर सरकार कर रही है विचार
14-Aug-2025 12:17 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार भारत आटा के साथ सोया मील के मिश्रण के विकल्प पर विचार कर रही है जिससे दो उद्देश्यों को हासिल करने में सहायता मिल सकती है।
एक तो देश की विशाल आबादी को प्रोटीन की आपूर्ति हो जाएगी और दूसरे सोयामील की घरेलू मांग एवं खपत को बढ़ाने के लिए एक नया क्षेत्र मिल जाएगा जिससे उद्योग को राहत मिलेगी। भारत से सोयामील का निर्यात घट रहा है और घरेलू प्रभाग में इसकी अधिशेष स्टॉक मौजूद रहता है।
एक अंतर मंत्रालयी पैनल ने सरकारी एजेंसी- नैफेड को इसकी कुल लागत एवं लाभप्रदता के बारे में अध्ययन-विश्लेषण करने का दायित्व सौंपा है। समझा जाता है कि शुरूआती चरण के दौरान आटा में 5 प्रतिशत सोयामील के मिश्रण की अनुमति दी जा सकती है और उसके बाद आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
उल्लेखनीय है कि सोयाबीन खरीफ सीजन की प्रमुख तिलहन फसल है और केन्द्र सरकार नेशनल ऑयल सीड्स मिशन के अंतर्गत निर्धारित इसके उत्पादन लक्ष्य को हासिल करने के लिए इसकी उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है।
यदि भारत आटा में सोयाबीन की मिलावट आरंभ हुई तो प्रोसेसर्स को अपना उत्पाद बेचने का बेहतरीन अवसर मिलेगा और परोक्ष रूप से सोयाबीन के दाम पर इसका सकारात्मक असर पड़ेगा। इससे किसानों को उत्पादन बढ़ाने का प्रोत्साहन मिलेगा।
सोयाबीन प्रोटीन से समृद्ध एक तिलहन फसल है। क्रशिंग-प्रोसेसिंग के दौरान इससे 18-20 प्रतिशत खाद्य तेल एवं 80-82 प्रतिशत ऑयल मील का निर्माण होता है।
आमतौर पर सोयामील का उपयोग पशु आहार एवं पॉल्ट्री फीड के उत्पादन में किया जाता है जबकि थोड़ी मात्रा में प्रत्यक्ष मानवीय खपत में भी इसका इस्तेमाल होता है। मिलर्स को सोयाबीन तेल से 35-40 प्रतिशत तथा सोयामील से 60-65 प्रतिशत आमदनी प्राप्त होती है।
इसके फलस्वरूप यदि मिलर्स को ऊंचे दाम पर सोयामील बेचने का अवसर मिलेगा तो वे किसानों से ऊंची कीमत पर सोयाबीन की खरीद कर सकते हैं। इसके साथ-साथ सोयाबीन से निर्मित खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल बढ़ाना सबके हित में होगा।
चूंकि भारत आटा की बिक्री सरकारी एजेंसियों द्वारा 30 रुपए प्रति किलो के रियायती मूल्य पर की जा रही है इसलिए सरकार इसमें सोयामील का मिश्रण करने पर विचार कर रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) भी इसकी स्वीकृति देता है।
