भारत-अमरीका व्यापार वार्ता में प्रगति से रूई की कीमत तेज

25-Apr-2025 04:28 PM

न्यूयार्क। भारत तथा अमरीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के लिए जारी बातचीत में सकारात्मक प्रगति का संकेत मिलने से रूई की कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बनने लगा है।

पिछले दिन इसका वायदा भाव बढ़कर चालू वर्ष के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया। न्यूयार्क एक्सचेंज में सर्वाधिक सक्रिय पोजीशन के लिए रूई के वायदा मूल्य में 3.5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। 

उल्लेखनीय है कि चालू माह के आरंभ में जब अमरीकी राष्ट्रपति ने विभिन्न देशों से आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क लगाने की घोषणा की थी तब रूई के वायदा मूल्य में नरमी आ गई थी मगर बाद में बाजार पहले स्थिर होता गया और अब वहां तेजी- मजबूती का माहौल बनने लगा है। 

भारत में अमरीका से रूई का आयात बढ़ रहा है जो यहां मांग में हो रही वृद्धि का स्पष्ट संकेत है। अमरीका के राष्ट्रपति द्वारा घोषित टैरिफ के कारण चीन में अमरीकी रूई का निर्यात ठप्प पड़ जाने की आशंका है इसलिए अमरीका को वैकल्पिक बाजार की तलाश है और उसे लगता है कि भारत चीन की कमी को पूरा कर सकता है।

चीन के बाद भारत दुनिया में कपास का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक एवं  उपभोक्ता देश है। अमरीका रूई के उत्पादन में तीसरे नम्बर पर है मगर इसके निर्यात में प्रथम स्थान पर रहता है क्योंकि वहां इसकी घरेलू खपत बहुत कम होती है। 

अमरीका के उपराष्ट्रपति फिलहाल भारत के दौरे पर हैं। उनका कहना है कि भारत और अमरीका चालू वर्ष की समाप्ति तक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के प्रयास में है। इस समझौते के बाद भारत में अमरीकी रूई का आयात बढ़ सकता है।

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव आने के संकेत मिल रहे हैं जिससे भारत से कॉटन यार्न, फैब्रिक्स तथा सूती वस्त्रों एवं वस्त्र उत्पादों के निर्यात में अच्छी वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे टेक्सटाइल मिलों में रूई की मांग एवं खपत में इजाफा हो सकता है।

2024-25 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान देश में कपास का उत्पादन घटकर 300 लाख गांठ से नीचे आने का अनुमान है जिससे इसका आयात बढ़कर 30 लाख गांठ से ऊपर पहुंच सकता है। रूई पर 11 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा हुआ है।