भारत ब्रांड उत्पादों की बिक्री पर 2000 करोड़ रुपए का खर्च

03-Jul-2024 03:29 PM

नई दिल्ली । घरेलू प्रभाग में खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार ने भारत ब्रांड नाम के तहत रियायती मूल्य पर आम उपभोक्ताओं को चना दाल, आटा, चावल तथा प्याज उपलब्ध करवाना शुरू किया।

था मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) स्कीम के तहत चावल तथा आटा की बिक्री पर सरकार द्वारा करीब 2000 करोड़ रुपए खर्च किए गए। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए जो अंतरिम बजट आया था उसमें खाद्य सब्सिडी के मद में 2.05 ट्रिलियन रुपए से कम लेकिन 2022-23 के कुल वास्तविक व्यय 1.97 ट्रिलियन रुपए से ज्यादा है। 

विश्लेषकों के अनुसार खाद्य उत्पादों के खुदरा बिक्री क्षेत्र में सरकार के हस्तक्षेप से गरीब वर्ग को राहत मिल रही है। इसके तहत सरकार किसानों से अनाज एवं दलहन खरीदती है।

उसकी मिलिंग-प्रोसेसिंग करवाती है और फिर अपनी अधीनस्थ एजेंसियों के माध्यम से रियायती मूल पर उसकी बिक्री करती है। दरअसल उच्च आय वर्ग की तुलना में निम्न आय वर्ग के लोग खाद्य पदार्थों की खरीद पर अपनी आमदनी का अधिक भाग खर्च करते हैं। 

एक अग्रणी विश्लेषक के अनुसार आय संवर्ग के पिरामिड में सबसे निचले स्तर के लोग या यूं कहें कि देश के सबसे कम आमदनी वाले 50-60 प्रतिशत परिवार ऊंची महंगाई का सामना करने में भारी कठिनाई महसूस कर रहे हैं।

बेशक सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत उसे मुफ्त में अनाज (चावल एवं गेहूं) उपलब्ध करवा रही है मगर खच यहीं तक सीमित नहीं रहता है।

दाल-तेल, चीनी, नमक, सब्जी एवं दूध आदि आवश्यक वस्तुओं का दाम बढ़कर उसकी पहुंच से बाहर होने लगा है जिसके लिए सरकार की तरफ से कोई राहत या सब्सिडी नहीं दी जा रही है।

भारत ब्रांड चना दाल 60 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध है जबकि खुले बाजार में चना दाल के साथ-साथ तुवर, उड़द, मसूर एवं मूंग आदि की दाल का भाव अत्यन्त ऊंचे स्तर पर चल रहा है।