भारत में रिकॉर्ड उत्पादन से चावल के वैश्विक बाजार भाव पर दबाव
12-Jan-2026 04:04 PM
नई दिल्ली। भारत में पिछले कुछ वर्षों से चावल का शानदार उत्पादन हो रहा है और 2025-26 के मौजूदा सीजन के दौरान भी इसका रिकॉर्ड उत्पादन होने का अनुमान है।
इसके फलस्वरूप वहां निर्यात उद्देश्य के लिए चावल का विशाल स्टॉक उपलब्ध हो रहा है जिससे वैश्विक बाजार मूल्य पर काफी हद तक दबाव देखा जा रहा है। भारत दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश है और कुल वैश्विक निर्यात में 40-42 प्रतिशत का योगदान देता है।
व्यापारिक विश्लेषकों के अनुसार भारत के विशाल उत्पादन की खबर से वैश्विक बाजार में चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी रहेगी जिससे इसकी कीमतों पर आगे भी दबाव बरकरार रह सकता है।
ध्यान देने वाली बात है कि चावल की वैश्विक मांग कमजोर बनी हुई है और प्रमुख खरीदार देशों ने अपने आयात नियमों को काफी सख्त बना दिया है। इससे भारतीय किसानों की परेशानी बढ़ सकती है
और उसे अपने धान का आकर्षक या लाभप्रद मूल्य प्राप्त करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ सकता है। भारतीय निर्यातकों को थाईलैंड, वियतनाम एवं पाकिस्तान जैसे देशों की तुलना में अपने चावल का भाव प्रतिस्पर्धी स्तर पर रखने के लिए विवश होना पड़ेगा।
रायपुर में पिछले सप्ताह आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस सम्मिट में एक अग्रणी निर्यातक ने कहा कि खरीदार फिलहाल विक्रेताओं के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं और यह देखने-समझने की कोशिश कर रहे हैं कि भारत में चावल का भाव घटकर किस हद तक नीचे आ सकता है क्योंकि यहां चावल का विशाल अधिशेष स्टॉक मौजूद है।
प्रमुख उत्पादक देशों में बेहतर उत्पादन के कारण चावल का आरक्षित भंडार बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं जिससे वैश्विक बाजार भाव पर दबाव कायम रह सकता है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार 2025-26 के खरीफ सीजन के दौरान देश में चावल का कुल उत्पादन तेजी से बढ़कर 1245 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है।
इसका नया माल अभी मार्केट में तेजी से आ रहा है। विश्लेषक के मुताबिक भारतीय गैर बासमती चावल का निर्यात ऑफर मूल्य फिलहाल 350 डॉलर प्रति टन के आसपास चल रहा है जो मार्च-अप्रैल तक 15-25 डॉलर प्रति टन तक घट सकता है। अफ्रीका तथा मध्य-पूर्व देशों में निकट भविष्य में चावल की मांग कमजोर रह सकती है।
