भारत सरकार गेहूं के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को नहीं हटाएगी

13-Jun-2025 01:19 PM

नई दिल्ली। शानदार घरेलू उत्पादन के बावजूद भारत सरकार ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को औपचारिक तौर पर सूचित कर दिया है कि गेहूं के व्यापारिक निर्यात पर लागू प्रतिबंध को नहीं हटाया जाएगा क्योंकि सरकार की प्राथमिकता घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की है। इसके अलावा अत्यन्त जरूरतमंद देशों और पड़ोसी देशों की खाद्य जरूरतों को भी पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। 

विश्व व्यापार संगठन की कृषि समिति के पास जमा की गई सूचना में भारत ने स्पष्ट किया है कि गेहूं के निर्यात पर हमेशा के लिए या स्थायी रूप से प्रतिबंध नहीं लगाया गया है बल्कि अस्थायी तौर पर रोक लगाई गई है। मई 2022 में पहली बार निर्यात पर पाबंदी लगाई गई थी जो अब भी बरकरार है क्योंकि इसका समुचित उत्पादन नहीं हुआ और वैश्विक बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव जारी रहा। भारत को अपनी विशाल जनसंख्या की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वदेशी प्रभाग में गेहूं की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने की आवश्यकता है। 

भारत का कहना है कि उसने जीएटीटी 1994 के आर्टिकल XI ; 2 (ए) तथा कृषि समझौते के आर्थिकल 121 के अनुरूप अपनी नीति में बदलाव करते हुए गेहूं के निर्यात को 'मुक्त' श्रेणी से बाहर निकालकर 'प्रतिबंधित' सूची में डाल दिया है और इस तरह इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न के निर्यात पर अस्थायी रूप से पाबंदी लग गई। लेकिन सरकारी तौर पर इसके निर्यात का विकल्प खुला रखा गया और मानवीय सहायता के तहत भी इसकी आपूर्ति की जा रही है। जरूरतमंद देशों की सरकार अगर भारत सरकार से गेहूं आयात के लिए लिखित रूप में आग्रह करती है तो उसकी खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत सरकार इसके निर्यात की अनुमति प्रदान करती है। 

इतना संकेत तो पहले से ही प्राप्त हो रहा है कि भारत सरकार कम से कम चालू वर्ष के दौरान गेहूं एवं उसके उत्पादों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का निर्णय नहीं लेगी। बेशक इस बार देश में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है मगर पाइपलाइन खाली था।