भारतीय चावल का ऑफर मूल्य आकर्षक स्तर पर बरकरार

12-Jan-2026 08:52 PM

काकीनाडा। भारत संसार में चावल का सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यातक देश है और वैश्विक निर्यात बाजार में इसका औसत वार्षिक योगदान 40-42 प्रतिशत के उच्च स्तर पर रहता है।

वास्तविकता तो यह है कि भारत से चावल का सालाना निर्यात तीन अन्य प्रमुख आपूर्ति आपूर्तिकर्ता देश थाईलैंड, वियतनाम एवं पाकिस्तान के संयुक्त शिपमेंट से भी ज्यादा होता है इसलिए जब कभी भारत से शिपमेंट में किसी तरह की बाधा पड़ती है तब वैश्विक बाजार में चावल का भाव तेजी से ऊपर उठ जाता है। वर्ष 2023 एवं 2024 में ऐसा हो चुका है। 

वर्तमान समय में भारतीय गैर बासमती चावल का औसत इकाई निर्यात ऑफर मूल्य सर्वाधिक प्रतिस्पर्धी एवं आयातकों के लिए आकर्षक स्तर पर चल रहा है लेकिन इसके बावजूद आयातक देशों में इसकी मांग कमजोर बनी हुई है।

समझा जाता है कि विदेशी खरीदार चावल के वैश्विक बाजार मूल्य में कुछ और नरमी आने का इंतजार कर रहे हैं। मांग कमजोर रहने पर भारतीय निर्यातकों को चावल के निर्यात ऑफर मूल्य में 15-20 डॉलर प्रति टन की और कटौती करनी पड़ सकती है।

डॉलर के मुकाबले रुपए की विनिमय दर घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर आने से भारतीय चावल का ऑफर मूल्य और भी आकर्षक हो गया है। 

प्रतिस्पर्धी कीमत एवं स्टॉक की विशाल उपलब्धता के सहारे भारत के चावल को उन खोए हुए बाजारों को दोबारा शामिल करने में सहायता मिल रही है जिसे वर्ष 2023 एवं 2024 में गंवा दिया गया था।

वर्ष 2025 में भारत से 151.50 लाख टन गैर बासमती या सामान्य श्रेणी तथा 64 लाख टन बासमती किस्म के साथ कुल 215.50 लाख टन चावल का शानदार शिपमेंट हुआ जो अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा स्तर रहा।

इस बार खरीफ सीजन में चावल का रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन होने का अनुमान है जबकि रुपया भी निचले स्तर पर चल रहा है।