भारतीय कंपनियों की विदेशी शाखाओं द्वारा पाकिस्तानी बासमती चावल का कारोबार

12-Aug-2025 03:59 PM

मुम्बई। कृषि उत्पादों के आयात के निर्यात पर उपलब्ध वैश्विक आंकड़ों का आंकलन-विश्लेषण करने से ज्ञात होता है कि दो-तीन भारतीय कंपनियों की विदेशी शाखाओं तथा भारत में सूचीबद्ध कुछ विदेशी कारोबार वाली फर्मों द्वारा पाकिस्तान से चावल मंगाकर उसे यूरोप एवं अन्य बाजारों में निर्यात किया जा रहा है।

जानकारों के अनुसार आमतौर पर भारत से बासमती चावल का निर्यात करने वाली कुछ यूरोपीय फर्मों का पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ रणनीतिक गठजोड़ है। भारतीय कंपनियां नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) तथा बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में सूचीबद्ध है। 

उल्लेखनीय है कि यह लगाम आतंकवादी हमले के बाद विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने भारत की सभी कंपनियों को पाकिस्तान से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सभी तरह के कारोबार को रोकने का निर्देश दिया था।

डीजीएफटी ने कहा था कि किसी भी भारतीय कम्पनी को न तो पाकिस्तान से कोई उत्पाद खरीदना चाहिए और न ही कोई सामान वहां भेजना चाहिए। मगर 2 मई 2025 को जारी इस दिशा निर्देश के बाद भी भारत की कुछ फर्मों ने पाकिस्तान से अन्य उत्पादों के साथ 14,300 टन बासमती चावल मंगाकर निर्यात कर दिया।

व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक पाकिस्तान से यूरोप एवं अन्य बाजारों को बासमती चावल के निर्यात शिपमेंट के दो मुद्दे या पहलू हैं। पहला मुद्दा यह है कि जब भारत यह दावा कर रहा है कि लम्बे दाने वाला सुगन्धित बासमती चावल इसका अपना खास उत्पाद है तब कोई फर्म पाकिस्तान से उसका शिपमेंट कैसे कर सकती है।

इस घटनाक्रम से जुड़ा दूसरा मुद्दा यह है कि क्या इस हरकत से भारत को यूरोप सहित अन्य देशों में बासमती चावल के लिए एकल तौर पर भौगोलिक संकेतक (जीआई) का दर्जा हासिल करना कठिन नहीं हो जाएगा। 

प्राप्त सूचना के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों में से एक ने 3 मई से 4 जून के बीच पाकिस्तान की अल बहाब राइस से करीब 125 टन बासमती चावल खरीदकर हॉलैंड को उसका निर्यात कर दिया जबकि भारत के डीजीएफटी ने इस पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया था।

इसके अलावा भारतीयों द्वारा यूरोप में संचालित दो कंपनियों ने पाकिस्तान की सारावार, फातिमा, सुप्रीम तथा राणा राइस मील से करीब 9000 टन बासमती चावल खरीदकर ब्रिटेन में उसका निर्यात किया। यह शिपमेंट 6 मई से 29 जून के बीच हुआ। ऐसा नहीं होना चाहिए था। यह देश के साथ गद्दारी माना जाएगा।